उत्तराखंड शिक्षा विभाग की बड़ी उपलब्धि: PGI रैंकिंग में 34वें से सीधा 9वें स्थान पर पहुँचा राज्य

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उत्तराखंड ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग में जबरदस्त सुधार किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी हालिया ‘परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स’ (PGI) की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य महज एक साल के भीतर 34वें स्थान से लंबी छलांग लगाकर 9वें पायदान पर काबिज हो गया है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और निरंतर हो रहे शैक्षिक सुधारों की बदौलत राज्य का कुल स्कोर पिछले वर्ष के 526.3 से बढ़कर अब 584.5 हो गया है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही उत्तराखंड अब गुजरात, हरियाणा और तमिलनाडु जैसे विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है और ‘आकांक्षी-1’ ग्रेड से निकलकर ‘प्रचेष्टा-3’ श्रेणी में पहुंच गया है।

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समानता और सुशासन के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के विभिन्न मानकों पर गौर करें तो उत्तराखंड ने समानता के क्षेत्र में देशभर में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य ने बालक-बालिका, ग्रामीण-शहरी और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच शिक्षा की खाई को पाटने में सफलता पाई है, जिसके लिए उसे 260 में से 222.2 अंक मिले हैं। इसके अलावा, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए आधार सीडिंग और डिजिटल हाजिरी जैसी व्यवस्थाओं को मजबूती से लागू किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप गवर्नेंस प्रोसेस में राज्य को ‘प्रचेष्टा-1’ ग्रेड प्राप्त हुआ है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के अनुसार, विभाग द्वारा हाल के वर्षों में किए गए सुधारात्मक कदमों का ही यह सुखद परिणाम है।

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लर्निंग आउटकम और रिक्त पद अभी भी बड़ी चुनौती

रैंकिंग में इस बड़ी बढ़त के बावजूद रिपोर्ट के कुछ पहलू राज्य के लिए आत्ममंथन और भविष्य के सुधारों की ओर इशारा करते हैं। स्कूलों में छात्रों के सीखने के स्तर यानी ‘लर्निंग आउटकम’ के मामले में राज्य का प्रदर्शन अब भी उम्मीद के मुताबिक नहीं है, जहाँ 240 में से केवल 67.4 अंक ही प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही, प्रशासनिक स्तर पर शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की भारी कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। वर्तमान में माध्यमिक विद्यालयों में करीब 80 प्रतिशत प्रधानाचार्यों के पद खाली बताए गए हैं, जिन्हें शत-प्रतिशत भरना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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उत्तम श्रेणी तक पहुंचने के लिए भविष्य की राह

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यदि उत्तराखंड को PGI की ‘उत्तम’ या सर्वोच्च ‘उत्कृष्ट’ श्रेणी में पहुंचना है, तो उसे अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक ढांचे में और अधिक कड़े सुधार करने होंगे। इसमें विशेष रूप से एससीईआरटी (SCERT) और डायट (DIET) जैसी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रिक्त पदों पर नियुक्तियां और शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाना ही एकमात्र रास्ता है, ताकि भविष्य में राज्य शीर्ष तीन राज्यों में अपनी जगह पक्की कर सके।

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