देहरादून के जंगलों को निगल रहा होप्लो संक्रमण, हर साल कटेंगे 20 हजार पेड़

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देहरादून आम लीची के साथ-साथ साल के जंगलो के लिए भी मशहूर है। आम और लीची के बाग तो प्रोपर्टी डीलरों की बुरी नजर से बच नही पाए जबकि साल के जंगलों पर होप्लो कीट की नजर लग गई है। 31 साल बाद फिर से ‘होप्लो’ कीट की चपेट में आए साल के पेड़ों की कुर्बानी दी जाएगी। जिले की कई रेंजों में मौजूद साल के पेड़ों पर ‘होप्लो’ कीट कहर बन कर टूटा है। सौ से ज्यादा पेड़ सूखने की कगार पर हैं जबकि पांच डिवीजनों में होप्लो इन्फेक्शन तेजी से फैल रहा है।

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‘होप्लो’ की गिरफ्त में बाकी जंगल को बचाने की कवायद में राज्य से लेकर केंद्र सरकार जुटी हुई है। लेकिन कोई दूसरा रास्ता न देखते हुए केंद्र सरकार ने होप्लो के शिकंजे में फंसे पेड़ों को काटने की इजाजत दे दी है। बाकी के जंगल को होप्लो से महफूज रखने के लिए अब होप्लो प्रभावित 20 हजार साल के पेड़ों को काट दिया जाएगा।

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केंद्र सरकार की टीम ने दून की पांच रेंजो – आशारोड़ी, झाझरा, थानो, मल्हाण और मालसी समेत “दून जू” में साल के पेड़ों का मुआयना किया। मामले की नजाकत को भांपते हुए केंद्रीय टीम ने वन विभाग को जल्द समस्या से निपटने के निर्देश दिए. साथ ही FRI को होप्लो कीट का इसका स्थायी समाधान निकालने को कहा है।

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गौरतलब है कि साल 1995 में होप्लो इन्फेक्शन के कारण देहरादून में करीब एक लाख साल के पेड़ काटे गए थे. उसके बाद से आज तक इतने बड़े स्तर पर कटान नहीं हुआ .लेकिन अब 31 साल बाद साल के पेड़ों को होप्लो की बुरी नजर से बचाने के लिए फिर बीस हजार साल के पेड़ काटे जाएंगे।

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