उत्तराखंड में जल जीवन मिशन के तहत चल रही 649 पेयजल योजनाएं केंद्र सरकार से बजट जारी न होने के कारण बीच में ही लटक गई हैं। राज्य को केंद्र से करीब चार हजार करोड़ रुपये के बजट का इंतजार है, जिसके अभाव में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का काम पूरी तरह ठप हो गया है। हालांकि मई माह में कुछ धनराशि मिलने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन विभाग का मानना है कि पूरा बजट न मिलने तक इन योजनाओं को समय पर पूरा करना नामुमकिन होगा। इस प्रशासनिक देरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जिन्हें भीषण गर्मी के इस मौसम में भी नल से जल मिलने की उम्मीद पूरी होती नहीं दिख रही है।
गढ़वाल मंडल के जिलों में निर्माण कार्यों की सुस्त रफ्तार
गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों में पेयजल योजनाओं का बुरा हाल है। टिहरी जिले में स्वीकृत 400 योजनाओं में से कई का काम 40 प्रतिशत तक अधूरा है, जबकि उत्तरकाशी में जल निगम की 53 और जल संस्थान की 10 योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। पौड़ी जिले में स्थिति और भी चिंताजनक है क्योंकि वहां बीरोंखाल और यमकेश्वर जैसे क्षेत्रों की प्रमुख योजनाओं को फॉरेस्ट एनओसी मिलने में देरी हो रही है, जिससे करीब 20 प्रतिशत काम अभी भी शेष है। इसी तरह चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में भी सैकड़ों योजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन वदीलाखाल और चोपता जैसी पंपिंग योजनाओं के पूरा न होने से ग्रामीणों को इस गर्मी में भी पानी के लिए भटकना पड़ेगा।
कुमाऊं मंडल में भी प्यास बुझाने का इंतजार बरकरार
पेयजल का संकट केवल गढ़वाल तक सीमित नहीं है, कुमाऊं मंडल के जिलों में भी विकास की गति बहुत धीमी है। नैनीताल जिले की कुल 235 योजनाओं में से केवल 120 ही पूरी हो पाई हैं, जबकि भीमताल, ओखलकांडा और बेतालघाट जैसे इलाकों में दर्जनों योजनाएं बजट के इंतजार में रुकी हुई हैं। अल्मोड़ा में 40 और पिथौरागढ़ में 65 योजनाओं का काम अधूरा पड़ा है, जिससे बासुकीनाग और लोहाथल जैसी पेयजल योजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। पेयजल सचिव रणवीर सिंह चौहान का कहना है कि जैसे ही केंद्र से बजट प्राप्त होगा, काम में तेजी लाई जाएगी, लेकिन फिलहाल के हालातों को देखते हुए लगता है कि स्थानीय निवासियों को अभी और लंबा इंतजार करना होगा।
हरिद्वार और मैदानी क्षेत्रों में भी अधूरी पड़ी योजनाएं
पहाड़ी क्षेत्रों के साथ-साथ हरिद्वार जैसे मैदानी जिले में भी 65 पेयजल योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। जिले के धनपुरा, पदार्थ और रुड़की क्षेत्र के कई गांवों जैसे मंडावली और टिकोला काला में योजनाओं का काम 40 से 60 फीसदी तक ही पूरा हो सका है। बजट न मिलने के कारण ठेकेदारों ने काम रोक दिया है, जिसकी वजह से स्थानीय ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मुहैया नहीं कराई जा पा रही है। प्रशासन की इस सुस्ती और वित्तीय बाधाओं ने जल जीवन मिशन के उस लक्ष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है, जिसका वादा हर घर तक पानी पहुँचाने के लिए किया गया था।

