उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के निरंजनपुर में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान राज्य के पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प दोहराया। इस विशेष अवसर पर उन्होंने मत्स्य पालन को नई ऊंचाई देने के लिए रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन को हरी झंडी दिखाई और स्पष्ट किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए पशुपालन एक प्रमुख आधार है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के संगम से उत्तराखंड को 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पशुपालकों की आय में स्थिरता आएगी। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बद्री घी को मिले जीआई टैग और ट्राउट फार्मिंग जैसे नवाचारों से प्रदेश अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है।

पशुधन मिशन और स्वरोजगार के बढ़ते कदम
राज्य में ‘मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन’ के जरिए पशुपालन के क्षेत्र में क्रांति लाने की कोशिश की जा रही है, जिसके तहत लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक का भारी ऋण अनुदान दिया जा रहा है। गोट वैली और पोल्ट्री वैली जैसी दूरदर्शी योजनाओं ने पिछले चार वर्षों में साढ़े 11 हजार से अधिक लोगों को सीधे स्वरोजगार से जोड़ा है। इसके अलावा, सीमांत क्षेत्रों के पशुपालकों को वाइब्रेंट विलेज योजना के माध्यम से आईटीबीपी के जरिए सीधा बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है। पशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए 60 विकासखंडों में मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स की शुरुआत की गई है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में भी पशुओं को समय पर इलाज मिल सके।

दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और बद्री घी की वैश्विक पहचान
उत्तराखंड में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में पिछले चार वर्षों के दौरान प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पशुपालकों की मेहनत और सरकारी सहयोग का परिणाम है। सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को लगभग 380 करोड़ रुपये का भुगतान कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया गया है। सबसे गौरवशाली उपलब्धि प्रदेश की ‘बद्री गाय’ के घी को मिला देश का पहला जीआई टैग है, जिसने स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। सरकार का यह प्रयास न केवल पारंपरिक गौवंश के संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि इससे जुड़े किसानों के मुनाफे को भी कई गुना बढ़ा रहा है।

मत्स्य पालन में उत्तराखंड का दबदबा और निर्यात हब की योजना
मत्स्य पालन के क्षेत्र में उत्तराखंड एक ‘एक्सपोर्ट हब’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसकी विकास दर वर्तमान में 9 प्रतिशत से अधिक है। राज्य सरकार ने ट्राउट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए 170 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना शुरू की है, जिसके तहत उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में हाईटेक हैचरी स्थापित की जा रही हैं। भारत सरकार द्वारा उत्तराखंड को हिमालयी राज्यों की श्रेणी में ‘श्रेष्ठ मत्स्य राज्य’ का सम्मान मिलना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश का मत्स्य सेक्टर सही दिशा में है। इन योजनाओं का जमीनी असर पशुपालकों की सफलता की कहानियों में भी साफ दिखता है, जहां लोग साहिवाल गायों और चारा एफपीओ के माध्यम से सालाना करोड़ों का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं।


