राज्य में परिवहन कारोबारी भी एक ऐसा आयोग चाहते हैं जो विद्युत नियामक आयोग की तरह ही स्वतंत्र हो,जिसमें सभी पक्ष शामिल हों और जो चर्चा के बाद सबकी सहमति से ऐसा फैसला ले, जो सबके हित में हो, सरकार के भी, परिवहन कारोबारियों के भी और जनता के भी ।
परिवहन कारोबारियों का नजरिया है कि स्वतंत्र आयोग बनने से फैसलों में पारदर्शिता और सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। शुल्क और टैक्स थोपे नहीं जाएंगे बल्कि रायशुमारी के बाद आम सहमति से तय होंगे. जिन पर ऐतराज की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
इसके लिए टीजीएमओ और यातायात एवं पर्यटन विकास सहकारी संघ ने राज्य के परिवहन आयुक्त मुख्यालय को ज्ञापन दिया है। संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में परिवहन कारोबारी और जनता की राय के लिए कोई जगह नहीं है। लिहाजा कई बार फैसले प्रभावितो पक्षों से सलाह लिए बिना लिए जाते हैं जिससे वे जबरन थोपे गए लगते हैं।
उन्होने साल 2024 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य परिवहन प्राधिकरण ने यात्री कर में 5 फीसदी की वृद्धि का निर्णय लिया था। जबकि परिवहन कारोबारी इसका विरोध कर रहे थे। लिहाजा ऐसी नौबत ही न आए इसके लिए परिवहन नियामक आयोग बनाना चाहिए। ताकि सभी पक्षों के हित महफूज रहें।

