ISRO का खुलासा: सूर्य की बढ़ती तीव्रता धरती की ओर खींच रही है अंतरिक्ष का मलबा

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाले अध्ययन में चेतावनी दी है कि सूर्य की बढ़ती सक्रियता के कारण अंतरिक्ष में मौजूद पुराना मलबा और मृत सैटेलाइट अपनी निर्धारित कक्षा छोड़कर समय से पहले धरती की ओर गिर रहे हैं। तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के वैज्ञानिकों ने पहली बार यह साबित किया है कि सौर गतिविधियों का सीधा असर अंतरिक्ष मलबे की गति पर पड़ता है। अध्ययन के अनुसार, जब सूर्य अधिक सक्रिय होता है, तो वह तीव्र पराबैंगनी विकिरण उत्सर्जित करता है जिससे पृथ्वी का ऊपरी वायुमंडल गर्म होकर फैल जाता है और वहां का घनत्व बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ घनत्व सैटेलाइट्स की गति को धीमा कर देता है, जिससे वे नीचे की ओर खिंचने लगते हैं। यह खोज भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की सुरक्षा और मलबे के प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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सूर्य की गर्मी और वायुमंडलीय घनत्व का प्रभाव

वैज्ञानिकों ने समझाया है कि सूर्य की 11 साल की सक्रियता चक्र के दौरान जब सौर गतिविधियां अपने चरम पर होती हैं, तब पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल (थर्मोस्फीयर) की गैसें गर्म होकर फैलने लगती हैं। इस विस्तार के कारण अंतरिक्ष में एक तरह का अवरोध या ‘ड्रैग’ पैदा होता है, जो वहां मौजूद वस्तुओं की रफ्तार को कम कर देता है। चूंकि पुराने मलबे और मृत सैटेलाइट्स में खुद को नियंत्रित करने के लिए ईंधन नहीं होता, इसलिए वे इस खिंचाव का सामना नहीं कर पाते और तेजी से नीचे गिरने लगते हैं। इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने 1960 के दशक में लॉन्च किए गए मलबे के टुकड़ों का पिछले 36 वर्षों के डेटा के आधार पर सूक्ष्म विश्लेषण किया है।

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सक्रिय सैटेलाइट्स के लिए बढ़ता खतरा और भविष्य की चुनौतियां

इस शोध में यह भी साफ किया गया है कि मलबे के इस तरह तेजी से नीचे गिरने के कारण अंतरिक्ष में सक्रिय सैटेलाइट्स के लिए जोखिम बढ़ गया है। मलबे के रास्ता बदलने से स्पेसएक्स जैसे मेगा-कॉन्स्टेलेशन (स्टारलिंक) और अन्य महत्वपूर्ण उपग्रहों के बीच टक्कर होने की संभावना प्रबल हो गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब सक्रिय सैटेलाइट्स को अपनी सही कक्षा में बनाए रखने के लिए पहले की तुलना में अधिक ईंधन की आवश्यकता होगी। ऐसे में सैटेलाइट ऑपरेटरों को अब मिशन डिजाइन करते समय सौर संक्रमण सीमा और अंतरिक्ष के इस बदलते पर्यावरण का विशेष ध्यान रखना होगा ताकि किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके।