उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून के थानो क्षेत्र में स्थित जामा मस्जिद कमेटी की ओर से अनधिकृत निर्माण की सीलिंग और शमन आवेदन निरस्त होने के खिलाफ दायर याचिका पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण को कानून के दायरे में रहते हुए इस पूरे मामले पर आगामी तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेने का आदेश देकर याचिका को निस्तारित कर दिया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और एमडीडीए की ओर से अधिवक्ता राहुल कंसल ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें पेश कीं। हाईकोर्ट ने एमडीडीए के सक्षम प्राधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता मस्जिद कमेटी को उन आवश्यक दस्तावेजों और आपत्तियों की एक स्पष्ट सूची सौंपें, जो इस मामले के निपटारे और नए आवेदन के लिए बेहद जरूरी हैं।
इसके बाद, याचिकाकर्ता द्वारा नए सिरे से आवेदन और आवश्यक कागजात जमा करने की तारीख से तीन माह के भीतर एमडीडीए को अपनी अंतिम रिपोर्ट और निर्णय प्रस्तुत करना होगा; हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता के पास भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए आवेदन करने का विकल्प खुला रहेगा।
गौरतलब है कि जामा मस्जिद थानो कमेटी ने एमडीडीए के 14 मई 2026 के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें मस्जिद परिसर में हुए अवैध निर्माण को सील करने का निर्देश दिया गया था। एमडीडीए के अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि कमेटी ने अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए शमन आवेदन तो किया था, लेकिन वे भूमि के स्वामित्व से जुड़े जरूरी दस्तावेज और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में पंजीकरण का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में पूरी तरह विफल रहे।
इसी दस्तावेजी कमी के कारण प्राधिकरण ने बीती 25 अप्रैल 2026 को उनका पुराना आवेदन खारिज कर दिया था, जिसके बाद यह मामला सीलिंग तक पहुंच गया। अब माननीय उच्च न्यायालय के इस नए दिशा-निर्देश के बाद एमडीडीए को तय समय सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ इस विवादित मामले का कानूनी निस्तारण करना होगा।

