सूबे की धामी सरकार राज्य के युवाओं को नौकरी करने वाला नहीं बल्कि नौकरी देना वाला बनाना चाहती है। इसके लिए योजना तैयार है। लेकिन देखा जा रहा है कि राज्य के नौजवानो को मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना की जानकारी नहीं है। लिहाजा राज्य के नौजवानो को मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के बारे पता चले वे उस पर अमल कर नौकरी देने वाला बने इसके लिए अब बड़े स्तर पर काम करने की योजना बना दी गई है।
सरकार चाहती है कि राज्य के नौजवानो तक योजना पहुंचे,, युवा उस पर अमल कर अपना भविष्य बनाएं। ऐसे में प्रचार-प्रसार की दरकार है। जिसके लिए सरकार जिलों में विशेष चौपाल लगाने जा रही है। ताकि राज्य के नौजवान मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के नियम कायदों से वाकिफ हो सकें। राज्य के ग्राम विकास सचिव धीराज गर्ब्याल ने योजना की राज्य स्तरीय संचालन समिति को कुछ निर्देश दिए हैं ताकि योजना गांव-गांव तक पहुंच सके।
इसके तहत देहरादून, पौड़ी अल्मोड़ा,चंपावत और रूद्रप्रयाग जिले मे विशेष चौपाल लगान के निर्देश दिए हैं। जिनमे योजना को लेकर विचार-विमर्श किया जाए चौपाल में जनप्रतिनिधियो और उद्यमियों को भी शामिल किया जाए ताकि स्थानीय युवा रोजगार के लिए उद्योग लगाने की हिम्मत जुटा सके उनमें आत्मविश्वास पैदा हो सके।
जहां पांच जिलों में चौपाल लगाने के निर्देश दिए गए हैं वहीं बाकि जिलों में योजना के प्रचार-प्रसार के लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता वाहनो को चलाने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि युवा अपने गांव में ही उद्योग या लघुउद्योग लगा कर जीवन स्तर सुधार सके।
वहीं स्वयं सहायता समूहों और कलस्टर स्तरीय संघों को सामुदायिक पर्यटन मॉडल से जोडने के निर्देश दिए गए हैं। तय है कि अगर सलीके से काम हुआ और स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने दिलचस्पी दिखाई तो पशु सखी और बैंक सखी को मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा। वही स्वयं सहायता समूह और क्लस्टर को पर्यटन मॉडल से जोड़ने को कहा गया है ताकि पर्यटन प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूह पर्यटन के जरिए रोजगार हासिल कर सके।

