उत्तराखंड के चारधाम पीक सीजन में हो रहे ओवरलोड, कम पड़ रहे संसाधन और बढ़ रहा कूड़े का संकट

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उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान के एक साल के गहन अध्ययन के बाद शासन को सौंपी गई रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसके अनुसार पीक सीजन में पहुँच रही भारी भीड़ के कारण केदारनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री और हेमकुंड साहिब में बुनियादी संसाधन बेहद कम पड़ रहे हैं।

इन मुख्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की क्षमता से अधिक संख्या होने के कारण धाम पूरी तरह ओवरलोड हो रहे हैं, जिससे वहां ठहरने, वाहन पार्किंग, शौचालय और सबसे बढ़कर कूड़ा निस्तारण का एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

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रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि केदारनाथ और यमुनोत्री में अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था बेहद खराब है, यहाँ तक कि गंगोत्री और यमुनोत्री के इको-सेंसिटिव जोन में कचरे को खुले में जलाया जा रहा है, और यमुनोत्री का इंसीनरेटर भी हिमनद के पास बना है जो वैज्ञानिक मानकों के खिलाफ है।

इसके अलावा, बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो रुद्र प्वाइंट से केदारनाथ के बीच सार्वजनिक शौचालयों की क्षमता रोटेशन के आधार पर केवल 2460 लोगों की है, जिसके कारण खुले में शौच की प्रवृत्ति बढ़ रही है। वहीं केदारनाथ धाम में मात्र 1054 वाहनों की पार्किंग क्षमता होने की वजह से पीक सीजन में सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है।

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पर्यावरण और वन्यजीवों पर पड़ रहे असर का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि केदारनाथ में हर घंटे उड़ने वाले 20 से 30 हेलीकॉप्टरों का शोर 50 डेसिबल से अधिक हो जाता है, जो वन्यजीवों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, साथ ही गंगोत्री में रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही भी पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है।

इन समस्याओं से निपटने के लिए डब्लूआईआई ने शासन को कई महत्वपूर्ण सिफारिशें दी हैं, जिनमें ऑनलाइन के बजाय ₹100 के शुल्क के साथ अनिवार्य पंजीकरण करने, मौके पर रजिस्ट्रेशन बंद करने, सोनप्रयाग से केदारनाथ मार्ग पर व्यापक मरम्मत करने, मानसून से पहले व बाद में अनिवार्य निरीक्षण करने, और यात्रा मार्गों पर हॉट वाटर एटीएम व पर्याप्त अतिरिक्त शौचालय व स्नानघर बनाने की सलाह दी गई है। फिलहाल इस ड्राफ्ट रिपोर्ट को बदरी-केदार मंदिर समिति और पर्यटन विभाग सहित सभी हितधारकों को सुझावों के लिए भेजा गया है, ताकि अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ठोस कदम उठाए जा सकें।