पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में इन दिनों हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं, जिसे लेकर भारत ने पाकिस्तान के इस क्रूर कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है। पीओके में आटा, बिजली, और बुनियादी सुविधाओं जैसी आवश्यक मांगों को लेकर आम नागरिकों द्वारा किए जा रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर वहां के सुरक्षाबलों, पाकिस्तानी रेंजर्स और पंजाब पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए अंधाधुंध गोलियां और आंसू गैस के गोले बरसाए हैं, जिसमें अब तक कम से कम 32 निर्दोष नागरिकों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
भारत सरकार ने इस अमानवीय कृत्य को पाकिस्तान का बर्बर चेहरा करार देते हुए वैश्विक समुदाय से मानवाधिकारों के इस घोर उल्लंघन के खिलाफ पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराने की पुरजोर अपील की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं, आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक नाकामियों को छिपाने के लिए लगातार झूठी खबरों और भ्रामक वीडियो का सहारा ले रहा है।
वह दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए सुनियोजित दुष्प्रचार कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि वहां के नागरिकों के मौलिक अधिकारों और सुरक्षा पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। मुजफ्फरराबाद, रावलकोट, भीमबर और कोटली जैसे प्रमुख शहरों में जनता ने पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है और वहां पूर्ण शटडाउन की स्थिति बनी हुई है।
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पाकिस्तानी प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और फोन लाइनों सहित संचार के सभी साधन पूरी तरह बंद कर दिए हैं और पूरी तरह से ब्लैकआउट लागू है। पाकिस्तान की इस दमनकारी नीति और पुलिसिया बर्बरता की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देने लगी है।
ब्रिटेन की संसद के 50 से अधिक सांसदों ने वहां की विदेश मंत्री यवेट कूपर को एक साझा पत्र लिखकर PoK में हो रही मनमानी गिरफ्तारियों, इंटरनेट पर पाबंदी और अत्यधिक बल प्रयोग पर गहरी चिंता जताई है, जिसके कारण ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी मूल के लोग अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर बेहद डरे हुए हैं।
इसके साथ ही, मानवाधिकार संगठनों ने भी इस संघर्ष पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि जन आंदोलनों पर प्रतिबंध लगाने से लोकतांत्रिक दायरा पूरी तरह कमजोर होगा और सरकार को इन मांगों को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने भी तीखा प्रहार करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर की गई इस क्रूर गोलीबारी की तुलना ऐतिहासिक ‘जलियांवाला बाग हत्याकांड’ से की है।

