इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इसे अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है, जिसके बाद उत्तराखंड में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है ताकि इस घातक वायरस के किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
डीजी हेल्थ डॉ. सुनीता टम्टा के निर्देशों के बाद देहरादून के सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा ने इस अलर्ट को अमलीजामा पहनाया है, जिसके तहत स्वास्थ्य टीमों को संदिग्ध मरीजों पर पैनी नजर रखने को कहा गया है। अस्पतालों को विशेष रूप से हिदायत दी गई है कि वे बुखार और सिरदर्द जैसी आम समस्याओं से पीड़ित मरीजों की भी गहनता से जांच करें, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।
संदिग्ध मरीजों की ट्रेवल हिस्ट्री खंगालने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों को इबोला वायरस के प्रमुख लक्षणों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहने को कहा है, जिनमें अचानक तेज बुखार आना, शारीरिक कमजोरी महसूस होना, मांसपेशियों में दर्द, गंभीर सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त या फिर त्वचा पर चकत्ते पड़ना शामिल हैं।
इसके साथ ही डॉक्टरों को यह विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है कि यदि कोई भी मरीज इन संदिग्ध लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंचता है, तो उसकी हालिया यात्रा के इतिहास की पूरी पड़ताल की जाए। यह देखा जाएगा कि क्या उस मरीज ने हाल ही में इबोला प्रभावित देशों या क्षेत्रों की यात्रा की है, जिससे संक्रमण के प्रसार को समय रहते रोका जा सके और प्रभावित व्यक्ति को तुरंत सही उपचार और आइसोलेशन दिया जा सके।

