आंगन में खड़ी है क्रेटा-बोलेरो, घर में AC… फिर भी गरीबों के हक का मुफ्त राशन डकार रहे थे ये संपन्न लोग

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उत्तराखंड के नैनीताल जिले में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा चलाए जा रहे घर-घर सत्यापन अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच टीमों को धरातल पर ऐसे कई परिवार मिले हैं जिनके पास आलीशान मकान, एयर कंडीशनर और आंगन में क्रेटा, बोलेरो जैसी महंगी गाड़ियां खड़ी हैं, लेकिन वे इसके बावजूद गरीबों के हक का मुफ्त राशन डकार रहे थे।

अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कई परिवार सालों पहले राशन के पात्र थे, लेकिन बाद में उनके बच्चे पढ़-लिखकर अच्छी सरकारी या निजी कंपनियों में स्थायी नौकरियों पर लग गए और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई। इसके बावजूद उन्होंने लालचवश खुद से अपना नाम सूची से नहीं हटवाया।

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विभाग की कड़ाई के बाद अब तक हल्द्वानी, रामनगर, नैनीताल, धारी, कालाढूंगी और श्रीकैंची धाम जैसे क्षेत्रों में 30,383 राशन कार्डों का सत्यापन कर 1,202 अपात्र राशन कार्डों और 5,116 यूनिटों को तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2025 में भी विभाग ने कड़ा एक्शन लेते हुए आयकर भरने वाले 37 हजार राशन कार्ड धारकों के नाम सूची से हटा दिए थे।

जानिए क्या हैं राशन कार्ड पात्रता के जरूरी नियम

इस पूरी व्यवस्था के सुचारू संचालन और वास्तविक गरीबों तक लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने आय के आधार पर राशन कार्डों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है। सबसे पहली श्रेणी अंत्योदय अन्न योजना की है, जिसके तहत उन परिवारों को ‘गुलाबी कार्ड’ दिया जाता है जिनकी सालाना आमदनी ₹48,000 तक या उससे कम है।

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दूसरी श्रेणी प्राथमिक परिवार की है, जिसमें ₹1.80 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवारों को ‘सफेद कार्ड’ जारी किया जाता है। इसके बाद तीसरी श्रेणी राज्य खाद्य योजना की आती है, जिसके तहत ₹5 लाख से कम सालाना कमाने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों को ‘पीला कार्ड’ प्रदान किया जाता है।

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आंकड़ों की बात करें तो अकेले नैनीताल जिले में करीब 2.32 लाख राशन कार्ड धारक हैं, जिनके माध्यम से कुल 9.51 लाख लोगों को राशन वितरित किया जाता है। जिला पूर्ति अधिकारी मनोज बर्मन ने साफ कर दिया है कि महंगी गाड़ियों और बड़े-बड़े घरों में रहने वाले संपन्न लेकिन अपात्र लोगों के नाम पकड़े जाने पर तुरंत काटे जा रहे हैं ताकि केवल जरूरतमंदों को ही इस योजना का लाभ मिल सके।

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