उत्तराखंड सरकार LUCC चिटफंड घोटाले के आरोपियों पर बड़ा शिकंजा कसने की तैयारी में है। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा इस मामले के कुछ आरोपियों को गिरफ्तार करने और उनकी संपत्तियों का ब्योरा सौंपने के बाद, राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वित्त विभाग को बड्स एक्ट के तहत तत्काल कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
इस कार्रवाई के तहत घोटालेबाजों की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क और अटैच किया जाएगा और उन्हें बेचकर पीड़ितों का डूबा हुआ पैसा वापस लौटाया जाएगा। करीब 800 करोड़ रुपये तक के इस महाघोटाले में सीबीआई अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनकी उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में फैली करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया राज्य वित्त सचिव के स्तर पर शुरू कर दी गई है।
RBI और विशेषज्ञों ने जारी की जरूरी गाइडलाइन
इस बड़े वित्तीय फ्रॉड के सामने आने के बाद निवेशकों को भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी से बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण सतर्कता दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। किसी भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी में पैसा लगाने से पहले RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उसकी प्रामाणिकता की जांच करना अनिवार्य है, क्योंकि वर्तमान नियमों के अनुसार कोई भी वैध एनबीएफसी 12.5% वार्षिक से अधिक ब्याज दर की पेशकश नहीं कर सकती है।
इसके अलावा, चार्टर्ड अकाउंटेंट रजत शर्मा और संजय मुनियाल जैसे विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि निवेशकों को निजी चिटफंड कंपनियों के अधिक लाभ वाले लालच में आने के बजाय सरकार द्वारा अधिकृत नियामक संस्थाओं, निधि कंपनियों या सरकारी वित्तीय संस्थानों में निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए।
किसी भी योजना में गाढ़ी कमाई लगाने से पहले सरकारी पंजीकरण प्रमाणपत्र, कंपनी के दस्तावेजों की गहनता से जांच और मैच्योरिटी की स्पष्ट शर्तों वाली रसीद लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि चेन सिस्टम, प्राइज चिट और पिरामिड जैसी योजनाएं पूरी तरह से प्रतिबंधित और गैर-कानूनी हैं।

