सरकारी महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत, सास-ससुर की गंभीर बीमारी पर भी मिलेगा मनचाहा तबादला

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उत्तराखंड सरकार ने चालू तबादला सत्र में एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण नीतिगत संशोधन किया है, जिसके तहत अब राज्य की विवाहित महिला सरकारी कर्मचारियों को उनके सास-ससुर की गंभीर बीमारी की स्थिति में भी अनुरोध के आधार पर अनिवार्य रूप से तबादले का लाभ मिल सकेगा।

अपर सचिव-कार्मिक गिरधारी सिंह रावत द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस मानवीय प्रस्ताव पर पहले मुख्य सचिव समिति की बैठक में विस्तृत चर्चा कर आम सहमति बनाई गई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री की अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति मिलने पर इसे तुरंत प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।

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सरकार के इस कल्याणकारी कदम से उन महिला कर्मियों को अपने परिवार और बुजुर्गों की देखभाल करने में बड़ी सहूलियत होगी जो दुर्गम क्षेत्रों में तैनात होने के कारण पारिवारिक जिम्मेदारियां नहीं निभा पा रही थीं।

समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कार्मिकों के लिए नई परिभाषा तय

इस नीतिगत संशोधन के अंतर्गत सरकार ने समूह ‘ग’ के लिपिकीय व गैर-प्रशासनिक कर्मचारियों तथा समूह ‘घ’ के चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों के लिए ‘गृह जनपद’ और ‘गृह स्थान’ की वैधानिक परिभाषा को पूरी तरह स्पष्ट और व्यापक बना दिया है। नए प्रावधानों के अनुसार, इन श्रेणियों के कर्मचारियों को अब केवल गृह जनपद के बजाय ‘गृह स्थान’ की अवधारणा के आधार पर ही प्राथमिकता के साथ तैनात किया जाएगा।

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इस नीति में गृह स्थान से तात्पर्य कर्मचारी के मूल निवास वाले वास्तविक गांव, राजस्व हल्का या तहसील क्षेत्र से माना गया है, जिसे अब और अधिक व्यापक रूप देते हुए नई तबादला नियमावली का मुख्य आधार बनाया गया है ताकि छोटे कर्मचारियों को उनके घर के नजदीक काम करने का अवसर मिल सके।

दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरण पर मिली बड़ी राहत

संशोधित नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी का दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में विधिवत तबादला हो जाता है और विभाग के पास उस पद पर तैनाती के लिए कोई रिप्लेसमेंट तुरंत उपलब्ध नहीं है, तो भी उस कर्मचारी का ट्रांसफर रोका नहीं जाएगा।

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बशर्ते यदि संबंधित विभाग का आवश्यक कार्य प्रभावित नहीं हो रहा हो, तो ऐसे स्थानांतरण वाले कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से उसके वर्तमान पद से कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। इसके अलावा, शिक्षा विभाग के मामलों को लेकर शासन स्तर पर एक अलग और विशेष विचार-विमर्श चल रहा है, क्योंकि वर्तमान में हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के चलते राज्य के सुगम-दुर्गम कोटिकरण पर आधारित वार्षिक अनिवार्य तबादलों पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगी हुई है।

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