उत्तराखंड बिजली नियामक आयोग का बड़ा फैसला, लोड बढ़ाने पर नहीं होगी अतिरिक्त शुल्क की वसूली

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उत्तराखंड के उद्योगों और बड़े बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां विद्युत नियामक आयोग ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग के आदेश के अनुसार, अब राज्य में बिजली कनेक्शन का भार बढ़वाने वाले उद्योगों या बड़े उपभोक्ताओं से ऊर्जा निगम किसी भी प्रकार का कनेक्टिविटी, पावर सिस्टम स्टडी, टेक्निकल फिजिबिलिटी या रजिस्ट्रेशन-सह-प्रोसेसिंग शुल्क नहीं वसूल सकेंगे।

यह मामला काशीपुर की कंपनी ‘काशी विश्वनाथ स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़ा था, जिसके पास पहले से 132 केवी पर 21,500 केवीए का कनेक्शन था और उसने इसी वोल्टेज स्तर पर अपना लोड 12,000 केवीए और बढ़ाने के लिए आवेदन किया था। यूपीसीएल ने इसके लिए उपभोक्ता से 40,000 रुपये का शुल्क लिया और बाद में पिटकुल ने टेक्निकल फिजिबिलिटी रिपोर्ट व कनेक्टिविटी एग्रीमेंट के नाम पर कुल 5,00,000 रुपये की अतिरिक्त मांग कर दी।

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इस पर आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद और सदस्य अनुराग शर्मा की पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए पिटकुल को कारण बताओ नोटिस जारी किया और स्पष्ट किया कि चूंकि उपभोक्ता ने समान वोल्टेज स्तर पर लोड बढ़ाने का आवेदन किया था, इसलिए नियमों के तहत उससे यह शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए और अब यूपीसीएल इस राशि को समायोजित करेगा।

विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की ऊर्जा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए देहरादून स्थित 30 मेगावाट क्षमता की कुल्हाड़ जल विद्युत परियोजना के लिए भारी बजट को मंजूरी दी है। आयोग ने इस परियोजना के जीर्णोद्धार, आधुनिकीकरण और अपग्रेडेशन के लिए 120.89 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है।

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यूजेवीएनएल की ओर से दायर याचिका पर आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य अनुराग शर्मा और सदस्य प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने यह आदेश जारी किया। लगभग 50 वर्ष की सेवा पूरी कर चुकी और साल 1975 में शुरू हुई इस पुरानी परियोजना के आधुनिकीकरण से इसकी मशीनों की कार्यक्षमता में बड़ा सुधार होगा और इसकी उम्र लगभग 35 वर्ष और बढ़ जाएगी, जिसे अनुबंध आवंटन के बाद 52 महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाना है।

नियामक आयोग ने उत्तरकाशी के धरासू स्थित चार मेगावाट के सोलर पावर प्रोजेक्ट से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण विवाद मामले में दायर याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। मामले पर विचार करते हुए आयोग ने तल्ख टिप्पणी की और कहा कि कंपनियों के बीच आपसी तालमेल तथा सहयोग की कमी के कारण ही यह विवाद की स्थिति पैदा हुई है।

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इसके समाधान के लिए आयोग ने सभी पक्षों को आपस में बैठकर विवाद सुलझाने और एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं। अब यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और निजी विकासकर्ता आपस में बैठक कर इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करेंगे और सबसे बेहतर समाधान का प्रस्ताव तैयार करेंगे, जिसके बैठक की मिनट्स (विस्तृत विवरण) को बाद में आयोग के सामने अनिवार्य रूप से पेश करना होगा।

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