धरातल पर न सड़क उतरी ना वादे! 14 साल के बीमार बेटे को पीठ पर लादकर 5 किमी पैदल चला पिता

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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी ग्रामीणों के लिए एक बड़ा अभिशाप बना हुआ है। कपकोट तहसील के बच्चीगांव का एक ऐसा ही हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण एक लाचार पिता, प्रेम राम को अपने बीमार बेटे को बचाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।

उनका 14 वर्षीय बेटा करन पिछले तीन दिनों से तेज बुखार से तड़प रहा था और गांव में कोई अस्पताल या डॉक्टर न होने के कारण उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। ग्रामीणों की सलाह पर, जब उसे जिला अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया, तो मुख्य सड़क तक पहुंचने का कोई साधन नहीं था।

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ऐसे में पिता ने हिम्मत नहीं हारी और अपने बेटे को पीठ पर बांधकर हरसिला-कपकोट के उबड़-खाबड़ और पथरीले पहाड़ी रास्ते पर करीब पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल ही नाप डाली। इस मुश्किल सफर में बीच-बीच में अन्य ग्रामीणों ने भी उनकी मदद की। मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद वाहन के जरिए उसे लगभग 24 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल बागेश्वर ले जाया गया, जहां उसे भर्ती कर उपचार दिया गया।

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हालांकि इलाज के बाद करन की तबीयत में सुधार तो हुआ, लेकिन वह अपने पैरों पर चलने की स्थिति में बिल्कुल नहीं था। नतीजतन, मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर वापस लौटते समय भी बेबस पिता को उसे दोबारा पीठ पर लादकर ही गांव की चढ़ाई चढ़नी पड़ी।

बच्चीगांव के निवासियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि वे लंबे समय से शासन, प्रशासन और अपने जनप्रतिनिधियों से गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण की गुहार लगाते आ रहे हैं, लेकिन उनकी यह वाजिब मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है।

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नेताओं और अधिकारियों के झूठे आश्वासनों के बीच ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। उचित सड़क मार्ग न होने के कारण आपातकालीन स्थितियों में सबसे ज्यादा परेशानी बीमार लोगों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है, जिन्हें समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बार अपनी जान तक गंवानी पड़ती है।

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