उत्तराखंड ऊर्जा निगम में अंधेरनगरी! बिना रीडिंग आंख मूंदकर बांटे जा रहे बिजली बिल, दफ्तरों के चक्कर काट रही जनता

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उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए जून का महीना बड़ा आर्थिक झटका लेकर आया है, क्योंकि ऊर्जा निगम ने फ्यूल पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट के तहत नई बिजली दरों को जारी कर दिया है। इस नए आदेश के बाद जून महीने में उपभोक्ताओं से 23 पैसे से लेकर 1.01 रुपये प्रति यूनिट तक का अतिरिक्त सरचार्ज वसूला जाएगा, जिसकी मार बीपीएल श्रेणी से लेकर घरेलू, कमर्शियल और औद्योगिक समेत हर वर्ग के उपभोक्ताओं पर पड़ेगी।

पहले इस सरचार्ज को सालाना बिजली दरों में एडजस्ट किया जाता था, लेकिन केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद उत्तराखंड में पिछले दो सालों से इसे हर महीने के बिल में जोड़ा जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं पर महंगी बिजली खरीद का सीधा बोझ आ पड़ा है। जून महीने में इस अतिरिक्त सरचार्ज के रूप में उपभोक्ताओं की जेब पर कुल 115 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बोझ पड़ेगा और औसतन हर उपभोक्ता से करीब 383 रुपये की अतिरिक्त वसूली की जाएगी।

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आँख मूंदकर बांटे जा रहे बिल

एक तरफ जहां बिजली की दरें लगातार बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा निगम का पूरा बिलिंग सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है और ठेकेदारों व आउटसोर्स एजेंसियों के भरोसे चल रहा है। खराब बिलिंग व्यवस्था का आलम यह है कि बंजारावाला के एक निवासी को 50 दिन में महज 35 यूनिट का बिल भेजा गया और उसके ठीक बाद सिर्फ 25 दिन में 916 यूनिट का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया, जिसे बाद में पिछले बिल की कमी को एडजस्ट करने का बहाना बनाकर सही ठहराया गया।

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इसी तरह टर्नर रोड के एक उपभोक्ता को अप्रैल में 3602 रुपये का बिल भेजा गया जिसमें मनमाने ढंग से एडिशनल सिक्योरिटी चार्ज जोड़ा गया और मई में फिर से अतिरिक्त सिक्योरिटी चार्ज वसूल लिया गया, जबकि उनकी पहले से ही हजारों रुपये की सिक्योरिटी जमा थी। विभागीय इंजीनियरों की लापरवाही के कारण जनता परेशान है और बिल ठीक करवाने के लिए भटकने को मजबूर है।

साउथ डिवीजन में सबसे ज्यादा खामियां

ऊर्जा निगम के बिलिंग सिस्टम को लेकर सबसे खराब और गंभीर स्थिति साउथ डिवीजन में देखने को मिल रही है, जहां सब-डिवीजन से लेकर डिवीजन स्तर तक अधिकारियों का अपनी आउटसोर्स एजेंसी और मीटर रीडरों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। लापरवाही का आलम यह है कि रीडर मौके पर जाकर सही रीडिंग लेने के बजाय आंख बंद करके गलत रीडिंग भेज रहे हैं, जिससे जनता त्रस्त है और समय पर बिल न भरने पर सीधे कनेक्शन काटने की धमकी दी जाती है।

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इस पूरे अव्यवस्थित मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए ऊर्जा निगम के निदेशक ऑपरेशन मदनराम आर्य ने कहा है कि उपभोक्ताओं की शिकायतों पर संबंधित इंजीनियरों से स्पष्टीकरण और जवाब मांगा जाएगा, साथ ही खामियां दूर न होने पर लापरवाह अधिकारियों व ठेका कंपनी के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।