भाजपा संगठन में बड़े बदलाव से बढ़ी मंत्री-विधायकों की बेचैनी, एंटी इनकंबेंसी से निपटने के लिए हाईकमान सख्त

ख़बर शेयर करें

उत्तराखंड में भाजपा नेतृत्व द्वारा प्रदेश महामंत्री संगठन के स्तर पर किए गए बदलाव को राज्य की राजनीति में एक बेहद अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव से करीब डेढ़ वर्ष पहले लिए गए इस अचानक फैसले ने सरकार के मंत्रियों और पार्टी विधायकों की चिंता और बेचैनी को काफी बढ़ा दिया है।

सियासी गलियारों में इस बदलाव को संगठन की ओर से नेताओं के प्रदर्शन और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता के आकलन के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करके चुनावी हैट्रिक बनाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है।

चूंकि पार्टी को राज्य सरकार में लगभग एक दशक पूरा होने जा रहा है, इसलिए कुछ क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से सत्ता विरोधी लहर की स्थिति बन सकती है, जिससे निपटने के लिए संगठन ने अभी से रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसी व्यापक चुनावी रणनीति के तहत पूर्व प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार को राजस्थान की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि उत्तराखंड में नए सिरे से चुनावी गोटियां फिट की जा सकें।

यह भी पढ़ें -  रुद्रप्रयाग: शिक्षा निदेशक के पैतृक गांव में 33 बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ एक शिक्षिका तैनात

विधायकों को सक्रियता बढ़ाने का निर्देश और आगामी सर्वे

पार्टी हाईकमान ने सभी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने साफ कर दिया है कि सभी विधायक जनता से अपना संवाद मजबूत करें और जमीनी स्तर पर अपनी हाजिरी बढ़ाएं।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड में 1.19 लाख युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण, नई योजना मंजूर

पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले महीनों में सभी विधानसभा क्षेत्रों का दोबारा से एक व्यापक आंतरिक सर्वे कराया जा सकता है। इस नए सर्वे के आधार पर जिन भी विधायकों या नेताओं का प्रदर्शन कमजोर पाया जाएगा, उन पर पार्टी हाईकमान टिकट वितरण के समय बेहद सख्त निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगा।

प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का भी कहना है कि देवभूमि में पार्टी की स्थिति भले ही मजबूत है, लेकिन हैट्रिक के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर एक विधायक और कार्यकर्ता को अपनी सक्रियता के स्तर को शीर्ष पर ले जाना ही होगा।

टिकट वितरण में कड़े फैसले के संकेत

भाजपा द्वारा पूर्व में कराए गए दो अलग-अलग आंतरिक सर्वेक्षणों के परिणाम पार्टी के लिए थोड़े चिंताजनक रहे हैं, क्योंकि उनमें करीब एक दर्जन मौजूदा विधायकों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर और असंतोषजनक पाई गई थी। ऐसे में वर्ष 2027 में जीत की हैट्रिक लगाने के अपने मुख्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए भाजपा संगठन इस बार उम्मीदवारों के चयन में कई कड़े और चौंकाने वाले फैसले ले सकता है।

यह भी पढ़ें -  नैनीताल: ज्योलीकोट में दूध से भरा ट्रक 200 फीट गहरी खाई में गिरा, चालक ने सूझबूझ से बचाई जान

कमजोर प्रदर्शन वाले विधायकों के टिकट कटने की पूरी संभावना बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी यही मानना है कि प्रदेश संगठन के ऊंचे पदों पर हाल ही में हुआ यह बड़ा फेरबदल इसी कड़े फैसले की प्रक्रिया की एक शुरुआती कड़ी है, जिसके जरिए भाजपा समय रहते एंटी इनकंबेंसी के असर को पूरी तरह खत्म करना चाहती है।