चुनाव खर्च का ब्योरा न देने वाले 336 प्रत्याशी अयोग्य घोषित, 3 साल तक चुनाव लड़ने पर लगी रोक

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उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने एक बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए वर्ष 2025 में संपन्न हुए स्थानीय नगर निकाय चुनावों में अपने चुनावी खर्च का लेखा-जोखा समय पर प्रस्तुत न करने वाले 336 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जिला निर्वाचन अधिकारियों की ओर से अंतिम नोटिस जारी किए जाने के बावजूद इन प्रत्याशियों ने नियमों का पालन नहीं किया और निर्वाचन व्यय का विवरण तय समय सीमा के भीतर जमा नहीं कराया।

इस कड़ी कार्रवाई के बाद अब ये सभी डिफॉल्टर उम्मीदवार अगले तीन वर्षों तक किसी भी मुख्य चुनाव या उप-चुनाव में भाग नहीं ले सकेंगे। इस बड़ी सूची में नगर निगमों के मेयर और पार्षद पद के दावेदारों से लेकर नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्ष व सदस्य पद का चुनाव लड़ने वाले कई बड़े नेता शामिल हैं, जिन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की अनदेखी करने का खामियाजा भुगतना पड़ा है।

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विभिन्न जिलों में व्यापक कार्रवाई

राज्य निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर हरिद्वार जिले में देखने को मिला है, जहां सर्वाधिक 112 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया गया है, जिनमें 30 नगर निगम पार्षद प्रत्याशी, 14 नगर पालिका सदस्य प्रत्याशी, दो नगर पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी और 66 नगर पंचायत सदस्य प्रत्याशी शामिल हैं।

इसके अलावा, ऊधमसिंहनगर में भी सख्ती बरतते हुए एक मेयर पद के उम्मीदवार, 60 नगर निगम पार्षद प्रत्याशी और 16 नगर पालिका परिषद सदस्य प्रत्याशी सहित कुल 77 लोगों पर गाज गिरी है। देहरादून में भी एक मेयर प्रत्याशी समेत कुल 72 लोग इस कार्रवाई की जद में आए हैं, जबकि पिथौरागढ़ में 22, नैनीताल में 21, टिहरी में 20, चम्पावत में 16, उत्तरकाशी में 11 और अल्मोड़ा में 5 उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराया गया है, जहां अल्मोड़ा के सभी अयोग्य उम्मीदवार नगर निगम पार्षद पद के प्रत्याशी हैं।

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चार जिलों के प्रत्याशियों ने समय पर दिया विवरण

इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में जहां राज्य के कई जिलों में बड़े पैमाने पर लापरवाही देखने को मिली, वहीं बागेश्वर, चमोली, पौड़ी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग जिलों के उम्मीदवारों ने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। इन चार जिलों के सभी प्रत्याशियों ने निर्वाचन व्यय का पूरा लेखा-जोखा बिल्कुल समय पर प्रस्तुत कर दिया, जिसके चलते आयोग को इन क्षेत्रों में किसी भी उम्मीदवार को कारण बताओ नोटिस जारी करने या अयोग्य ठहराने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

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इस पूरी कार्रवाई पर अपना कड़ा संदेश देते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने स्पष्ट कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और चुनाव खर्च का ब्योरा न देना सीधे तौर पर नियमों और चुनाव की आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

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