देहरादून को नशा मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है, जिसके तहत अब जिले के सभी सरकारी व निजी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बड़े स्तर पर ड्रग्स टेस्टिंग अभियान चलाया जाएगा। कलेक्ट्रेट में आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने साफ तौर पर कहा कि नशे की सप्लाई चेन को हर हाल में तोड़ना होगा और इस मुहिम को एक जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
युवाओं को नशे के दलदल से बचाने के लिए एसडीएम और पुलिस क्षेत्राधिकारियों की अगुवाई में विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जो नशा तस्करी में शामिल पैडलरों और संवेदनशील इलाकों को चिह्नित कर उनकी जीआईएस टैगिंग करेगी।
इसके साथ ही, दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए औषधि और स्वास्थ्य विभाग को दवा फैक्ट्रियों व मेडिकल स्टोरों का नियमित औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं तथा सभी मेडिकल स्टोरों, स्कूलों और कॉलेजों के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
नशीले पदार्थों की तस्करी की सूचना देने के लिए मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 और पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिसमें आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगी।
देहरादून में 99.39 करोड़ रुपये से होंगे विकास कार्य
इसी बैठक के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की जिला योजना संरचना को लेकर समीक्षा बैठक की, जिसमें जनपद देहरादून के लिए कुल 99.39 करोड़ रुपये का बजट अनुमोदित किया गया है। इस बजट के अंतर्गत राजधानी में जनप्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों और प्रस्तावों को शामिल करते हुए विभिन्न विकास कार्यों और स्थायी परियोजनाओं को गति दी जाएगी।
कुल बजट में से 37.19 करोड़ रुपये मानदेय एवं वचनबद्ध योजनाओं के लिए, 10.39 करोड़ रुपये चालू एवं अधूरे कार्यों को पूर्ण करने के लिए, 15.93 करोड़ रुपये स्वरोजगार संबंधी योजनाओं के लिए और 36.25 करोड़ रुपये नए एवं अभिनव कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रत्येक विभाग की एक अभिनव योजना को जिला योजना में अनिवार्य रूप से शामिल करें और जनहित आधारित, व्यावहारिक व नवाचारयुक्त योजनाएं ही प्रस्तावित करें।

