उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने अपने आवास पर एक खास ‘फल पार्टी’ का आयोजन किया, जिसमें तरबूज, खरबूज और पहाड़ी व्यंजनों का सियासी स्वाद देखने को मिला। ‘हरदा’ के नाम से मशहूर रावत ने इस कार्यक्रम के जरिए उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस पार्टी को उनकी हालिया ‘राजनीतिक अवकाश’ की घोषणा और पार्टी के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी में समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी, लेकिन कांग्रेस के बड़े दिग्गजों की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर की दूरियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
पहाड़ी व्यंजनों से सजी मेज, पर दिग्गज रहे नदारद
हरीश रावत ने इस पार्टी में स्थानीय उत्पादों जैसे जौनसार की टमाटर की चटनी, भट्ट की चुटकानी, लाल चावल और बुरांश के जूस का लुत्फ अपने समर्थकों के साथ उठाया। उन्होंने इसे एक गैर-राजनीतिक कार्यक्रम बताते हुए कहा कि वह हमेशा से राज्य के उत्पादों को प्रोत्साहित करते रहे हैं। हालांकि, इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह जैसे बड़े नेता पार्टी में नजर नहीं आए, जो चर्चा का विषय बना रहा।
फलों की मिठास और राजनीति की खटास
भले ही मेज पर मौसमी फलों की मिठास थी, लेकिन पार्टी के भीतर की कड़वाहट कम होती नहीं दिखी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अपनी अनुपस्थिति पर स्पष्ट किया कि टिहरी में पार्टी की रैली होने के कारण वे वहां नहीं पहुंच सके, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “अपनों को निमंत्रण नहीं दिया जाता”। वहीं, हरीश रावत के 15 दिनों के अवकाश के बाद भी उनके अगले कदम को लेकर संशय बना हुआ है, क्योंकि उन्होंने अभी तक खुलकर अपने भविष्य की रणनीति स्पष्ट नहीं की है।
सियासी संदेश और भविष्य की रणनीति
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पार्टी के जरिए हरीश रावत ने अपनी जनशक्ति का प्रदर्शन किया है। अवकाश के दौरान उनके द्वारा की गई बयानबाजी और फिर इस तरह का सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करना यह दर्शाता है कि वे अभी भी राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेताओं की दूरी यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में कांग्रेस के भीतर सांगठनिक स्तर पर हलचल और बढ़ सकती है।

