देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दो दिन के इंतजार के बाद शुक्रवार को दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा से मुलाकात की और अपना स्पष्टीकरण सौंपा। कुमाऊं परिक्षेत्र में बिना पूर्व अनुमति के ‘जनसंवाद यात्रा’ निकालने को लेकर पार्टी आलाकमान ने उनसे जवाब मांगा था, जिसके बाद यह हाई-प्रोफाइल बैठक हुई। इस मुलाकात से सूबे की सियासत में कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान के थमने के संकेत मिल रहे हैं।
पूर्व सीएम हरीश रावत सात अक्टूबर को ही दिल्ली पहुंच गए थे, लेकिन प्रभारी कुमारी सैलजा के हरियाणा दौरे पर होने के कारण बैठक टल गई थी। शुक्रवार को सैलजा के लौटने पर दोनों नेताओं के बीच लंबी चर्चा हुई, जिसमें राज्य के राजनीतिक हालात और संगठनात्मक रणनीतियों पर मंथन किया गया।
हालांकि बैठक की आधिकारिक अंदरूनी बातों का पूरी तरह खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का मकसद केवल राज्य हित के मुद्दों को उठाना और संगठन को मजबूत करना है।
मुलाकात के बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के साथ उनकी बहुत ही उपयोगी और सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने अपनी स्थिति को प्रभारी के समक्ष पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का एकमात्र उद्देश्य कांग्रेस संगठन को धरातल पर मजबूत करना है। जनसंवाद यात्रा को लेकर फैली चर्चाओं के बीच उन्होंने साफ किया कि जनता के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही बयानबाजी पर फिलहाल विराम लगेगा। आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए अब पार्टी नेतृत्व और वरिष्ठ नेता मिलकर आगे की रणनीति पर काम करेंगे।

