Uttarakhand Politics: ‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ के हितों के लिए हरदा रखेंगे एक दिवसीय उपवास

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देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने प्रदेश की नई पीढ़ी के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने देहरादून में कहा कि वह ‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ के हितों के प्रति राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक दिन का उपवास रखेंगे। हरीश रावत के इस कदम का सीधा असर प्रदेश के उन हजारों अभिभावकों और युवाओं पर पड़ेगा जो महंगी शिक्षा की समस्या से जूझ रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह दोनों पीढ़ियों के इन ज्वलंत सवालों को दलीय राजनीति के चश्मे से नहीं देखते हैं। उन्होंने कहा कि यह विषय किसी राजनीतिक लाभ-हानि का नहीं, बल्कि हमारे राज्य और देश के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसी कारण उनका यह सांकेतिक उपवास पूरी तरह से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आयोजित किया जाएगा।

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हरीश रावत ने चिंता जताते हुए कहा कि ‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ दोनों का भविष्य सामान्य और तकनीकी शिक्षा पर निर्भर है, लेकिन वर्तमान में शिक्षा के स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। इसके बावजूद सरकार की ओर से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए कोई भी सकारात्मक या ठोस कार्ययोजना अमल में नहीं लाई जा रही है।

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उत्तराखंड के बड़े शहरों में महंगी हुई प्राइवेट शिक्षा

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने प्रदेश में प्राइवेट शिक्षा के व्यवसायीकरण पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देहरादून, नैनीताल और मसूरी जैसे शहरी क्षेत्रों में स्थित बड़े शिक्षण संस्थानों में यदि उत्तराखंड के किसी स्थानीय बच्चे को प्रवेश मिल जाता है, तो वह खुद को बहुत भाग्यशाली मानता है। राज्य में स्थित होने के बावजूद इन प्रतिष्ठित संस्थानों का लाभ आम स्थानीय निवासी नहीं उठा पा रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूलों में लगातार बढ़ती फीस और अन्य खर्चों का भार परिवारों पर इतना अधिक बढ़ गया है कि एक अच्छा मध्यम वर्ग भी एक बच्चे के बाद दूसरे बच्चे की बेहतर शिक्षा का इंतजाम करने में लड़खड़ा रहा है। इन्हीं समस्याओं और महंगी होती शिक्षा व्यवस्था की तरफ शासन का ध्यान खींचने के लिए वह उपवास पर बैठेंगे।

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