उत्तराखंड के सभी उद्योगों और कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के साथ बेहतर समन्वय बनाने और उनके विवादों को सुलझाने के लिए अब अनिवार्य रूप से एक शिकायत निवारण समिति का गठन किया जाएगा। सचिव उद्योग विनय शंकर पांडेय ने श्रम संहिताओं के तहत इस समिति को गठित करने के सख्त आदेश दिए हैं, ताकि फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।
सेलाकुई में उद्योग और श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उद्योगों में बढ़ रहे श्रमिक असंतोष को खत्म करना और प्रबंधन व मजदूरों के बीच बातचीत के जरिए एक सकारात्मक माहौल तैयार करना है।
नियमित संवाद और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर
बैठक के दौरान उद्योगों में पनपने वाले असंतोष के मुख्य कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई और अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे श्रमिकों के साथ एक निश्चित समय अंतराल पर सीधा संवाद स्थापित करें। श्रम आयुक्त पीसी दुम्का ने इस असंतोष को जन्म देने वाले प्रमुख बिंदुओं जैसे कि समय पर भुगतान न होना, न्यूनतम वेतन की अनदेखी, और कार्यस्थल पर कमजोर स्वास्थ्य व सुरक्षा मानकों की जानकारी दी।
सरकार ने साफ किया है कि सभी कारखानों में आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एम्बुलेंस की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए, और जिन छोटी इकाइयों में 10 से कम कर्मचारी काम करते हैं, वहां आपातकाल के समय तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा का उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। महंगाई भत्ते के एरियर पर उद्योगों को सख्त आदेश
उद्योग सचिव ने इंडस्ट्रीज एसोसिएशन को कड़े लहजे में निर्देशित किया है कि वे नियमों का उल्लंघन बंद करें और सभी श्रमिकों को नियमानुसार मिलने वाला नियमित साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य रूप से प्रदान करें। इसके अलावा बैठक में श्रमिकों के महंगाई भत्ते के बकाया (एरियर) दिए जाने के मुद्दे पर भी गंभीर मंथन हुआ, जहां सचिव ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा नॉन-इंजीनियरिंग औद्योगिक इकाइयों के लिए परिवर्तनीय महंगाई भत्ता पहले ही घोषित किया जा चुका है और इसका लाभ कर्मियों को मिलना चाहिए।
इस महत्वपूर्ण बैठक में महानिदेशक उद्योग सौरभ गहरवार, अपर श्रम आयुक्त अनिल पेटवाल और महाप्रबंधक सिडकुल पूरन सिंह राणा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जो इस बात का संकेत है कि सरकार अब औद्योगिक क्षेत्र में श्रम नियमों को पूरी कड़ाई से लागू करने के मूड में है।

