अनाज से पटे सरकारी गोदाम,भारत में गेहूं और चावल का सर्वकालिक रिकॉर्ड स्टॉक

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देश में बंपर पैदावार और सरकार की आक्रामक खरीद रणनीति के चलते सरकारी गोदाम अनाज से पूरी तरह पट गए हैं और भारत में गेहूं व चावल का अब तक का रिकॉर्ड स्टॉक जमा हो चुका है। नई दिल्ली से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अल नीनो के खतरे और कम बारिश की आशंकाओं के बावजूद भारत का खाद्य निर्यात लगातार रफ्तार पकड़ रहा है, जिससे घरेलू कीमतों में भी तेजी के आसार दिखने लगे हैं।

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बाजार में गेहूं के तेवर कड़े हो रहे हैं और महज दो महीनों के भीतर दिल्ली, कानपुर और इंदौर जैसी बड़ी मंडियों में गेहूं करीब 6% तक महंगा हो चुका है; उदाहरण के लिए दिल्ली में जो गेहूं अप्रैल में 2550 रुपये प्रति क्विंटल था, वह 16 जून को बढ़कर 2700 रुपये पर पहुंच गया है।

इस तेजी के पीछे पहला मुख्य कारण गेहूं के निर्यात में आया जोरदार उछाल है, जो मार्च के मुकाबले अप्रैल में करीब सात गुना बढ़ चुका है, और दूसरा कारण सरकार द्वारा की गई रिकॉर्ड-तोड़ सरकारी खरीद है। चालू फसल वर्ष में अच्छी मानसूनी बारिश से देश में 12.06 करोड़ टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, जिससे 1 जून तक केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक पिछले पांच सालों के उच्चतम स्तर 5.34 करोड़ टन पर जा पहुंचा है।

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वहीं दूसरी ओर, चावल का भंडार भी बढ़कर अपने तय लक्ष्य से पांच गुना से ज्यादा हो गया है; फसल वर्ष 2025-26 में 15.4 करोड़ टन चावल के उत्पादन के साथ ही सरकारी गोदामों में चावल का कुल स्टॉक 6.84 करोड़ टन के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर है। जानकारों का मानना है कि दुनिया के कुल चावल निर्यात में अकेले 40 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाला भारत, इस महा-स्टॉक के दम पर बिना किसी डर के वैश्विक और घरेलू स्तर पर अपनी आक्रामक सप्लाई जारी रख सकेगा।