पूर्व सीएम हरीश रावत ने विरोधियों को दिया करारा जवाब: “अभी अवकाश पर रहूंगा, कमियों का विश्लेषण करूंगा”

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अवकाश पर जाने के फैसले ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उनके इस कदम के बाद कांग्रेस के भीतर ही बयानबाजी और सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया है। इन आलोचनाओं का कड़ा जवाब देते हुए रावत ने स्पष्ट किया है कि वे अभी कुछ और समय अवकाश पर रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस समय का उपयोग वे अपनी गलतियों को समझने और भविष्य की रणनीति तैयार करने के लिए कर रहे हैं। रावत का मानना है कि वे चुनाव भले ही हारे हों, लेकिन जनता के बीच उनकी पहचान आज भी बरकरार है।

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आलोचना करने वालों को करारा जवाब

सोशल मीडिया पर अपनी घेराबंदी करने वाले विरोधियों और पार्टी के सहयोगियों को जवाब देते हुए हरीश रावत ने कहा कि उनके कुछ दोस्तों ने व्यग्र होकर उन पर ‘शब्दों के नस्तर’ चलाना शुरू कर दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुझे हराने वालों का नाम शायद लोग भूल गए होंगे, लेकिन “हरीश रावत” आज भी हर किसी की जुबान पर है। उन्होंने विरोधियों को याद दिलाया कि उन्होंने हमेशा राज्य के मुद्दों पर सकारात्मक दृष्टिकोण रखा है।

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अवकाश के दौरान भविष्य की तैयारी और लेखन

हरीश रावत ने इस अवकाश को एक अवसर के रूप में लिया है। उन्होंने बताया कि इस खाली समय में वे अपनी पुस्तक ‘उत्तराखंडियत पार्ट-दो’ को अंतिम रूप दे रहे हैं। इसके साथ ही, वे इस बात पर भी गहरा मंथन कर रहे हैं कि 2017 और 2022 के चुनावों में उनका ‘सांस्कृतिक विकासवाद’ का नैरेटिव भाजपा के ‘धार्मिक कट्टरता आधारित राष्ट्रवाद’ के मुकाबले कमजोर क्यों पड़ गया। वे आत्म-चिंतन के जरिए इन राजनीतिक कमियों का विश्लेषण कर रहे हैं।

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सियासी माहौल और पार्टी की स्थिति

रावत के अवकाश पर रहने के फैसले और उनके द्वारा की गई टिप्पणियों से पार्टी नेताओं के बीच आपसी खींचतान और तेज हो गई है। देहरादून के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा गर्म है कि हरीश रावत का अगला कदम क्या होगा और उनके इस विश्लेषण से भविष्य में कांग्रेस की रणनीति में क्या बदलाव आएंगे।

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