मैदानी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और भीषण तपिश ने उत्तराखंड के पर्यटन कारोबार में जान फूंक दी है। सरोवर नगरी नैनीताल सहित कौसानी, रानीखेत और कैंची धाम जैसे हिल स्टेशनों पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल अप्रैल महीने में ही पर्यटकों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पर्यटन कारोबारियों का मानना है कि 15 मई से स्कूलों की छुट्टियां शुरू होने के बाद ‘पीक सीजन’ में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ेगी। पर्यटकों की इसी बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने हल्द्वानी और काठगोदाम से ही ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू कर दिया है।
कौसानी और नैनीताल में पर्यटन की शानदार रफ्तार
कुमाऊं के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर इस बार सीजन की शुरुआत धमाकेदार रही है। जिला पर्यटन अधिकारी के अनुसार, कौसानी में पिछले वर्ष अप्रैल में जहां 6295 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 6895 तक पहुंच गया है। कौसानी और आसपास के करीब 80 होटलों में मई और जून के लिए 50 प्रतिशत तक एडवांस बुकिंग अभी से हो चुकी है। जंगलों की आग जैसी चुनौतियों के बावजूद, पहाड़ों में सुबह-रात की ठंडक और बीच-बीच में हो रही वर्षा सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
पश्चिम एशिया संकट का भारतीय पर्यटन को मिला लाभ
नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अनुसार, इस बार पर्यटन सीजन समय से पहले शुरू होने का एक बड़ा और दिलचस्प कारण पश्चिम एशिया में जारी युद्ध भी है। खाड़ी देशों में तनावपूर्ण स्थितियों के कारण जो भारतीय पर्यटक विदेश यात्रा की योजना बना रहे थे, उन्होंने अब अपना रुख देश के पहाड़ी क्षेत्रों की ओर कर लिया है। इसका सीधा लाभ नैनीताल के साथ-साथ देश के अन्य हिल स्टेशनों को भी मिल रहा है।
वीकेंड पर उमड़ रही भीड़ और ट्रैफिक व्यवस्था
वीकेंड के दौरान नैनीताल और प्रसिद्ध कैंची धाम में पर्यटकों की आमद इतनी बढ़ गई है कि पुलिस को यातायात व्यवस्था संभालने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं। ट्रैफिक जाम की स्थिति से बचने के लिए मैदानी प्रवेश द्वारों पर ही वाहनों को नियंत्रित किया जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह सीजन उत्तराखंड के पर्यटन व्यवसाय के लिए पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ देगा।

