आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की राजनीति और न्यायपालिका के मोर्चे पर एक साथ दो बड़े संघर्ष छेड़ दिए हैं। एक ओर जहां पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की एक विशेष बेंच की कार्यवाही में शामिल होने से इनकार कर दिया है, वहीं दूसरी ओर पार्टी सांसद संजय सिंह ने दलबदल के मुद्दे पर सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दे डाली है। ये दोनों ही कदम आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति और कानूनी लड़ाई को एक नया मोड़ दे सकते हैं।
केजरीवाल का ‘न्यायिक सत्याग्रह’
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पेश होने से मना कर दिया है। उन्होंने जज को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि वे आबकारी मामले की सुनवाई के दौरान न तो खुद कोर्ट आएंगे और न ही उनके वकील कोई दलील पेश करेंगे।
- हितों के टकराव का आरोप: केजरीवाल का तर्क है कि उन्होंने पहले ही जज से इस केस से हटने का अनुरोध किया था, लेकिन उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया गया।
- सत्याग्रह का रास्ता: केजरीवाल ने इसे महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर आधारित ‘सत्याग्रह’ बताया है। उनका कहना है कि उन्हें इस अदालत से न्याय की उम्मीद नहीं है, हालांकि वे भविष्य में आने वाले फैसले के खिलाफ अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।
दलबदल कानून पर आर-पार: ‘आप’ के निशाने पर सात पूर्व सांसद
एक तरफ जहां केजरीवाल अदालत से दूरी बना रहे हैं, वहीं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सात पूर्व सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि यदि दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों को जल्द अयोग्य घोषित नहीं किया गया, तो पार्टी सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी।
- 10वीं अनुसूची का उल्लंघन: संजय सिंह का आरोप है कि इन सदस्यों ने संविधान की दसवीं अनुसूची के नियमों को तोड़ा है। पार्टी का कहना है कि उनकी शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
- लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा: संजय सिंह ने जोर देकर कहा कि दलबदल कानून की भावना को बचाए रखना जरूरी है और संवैधानिक संस्थाओं की देरी के खिलाफ वे देश की सबसे बड़ी अदालत में न्याय मांगेंगे।

