केंद्र सरकार ने भारत की सामरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों को ‘हवाई पट्टियों’ में बदलने का एक बड़ा मिशन शुरू किया है। इसके तहत देशभर के विभिन्न राजमार्गों पर 25 इमरजेंसी लैंडिंग पट्टियां बनाई जाएंगी, जिनका उपयोग आपातकाल के दौरान लड़ाकू जेट और परिवहन विमानों की लैंडिंग व टेक-ऑफ के लिए किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य युद्ध जैसे हालातों में यदि मुख्य एयरबेस को नुकसान पहुँचता है, तो भी भारतीय वायुसेना देश के किसी भी कोने से दुश्मन को जवाब दे सके। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस मिशन को 2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
3500 करोड़ का बजट और अत्याधुनिक सुविधाएं
सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इन हवाई पट्टियों के आसपास केवल रनवे ही नहीं, बल्कि छोटे सर्विस-वे और पार्किंग क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। वर्तमान में मिट्टी की मजबूती और अवरोध-मुक्त क्षेत्रों का सर्वे अपने अंतिम दौर में है। यह कदम भारत को उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल कर देगा जिनके पास सड़कों पर ही एक समानांतर वायुसेना तैनात करने की अद्भुत क्षमता है।
ड्रोन तकनीक और सामरिक सुरक्षा
पहली बार हाईवे को ड्रोन की जरूरतों के हिसाब से भी तैयार किया जा रहा है। इन पट्टियों के पास ड्रोन पोर्ट्स बनाने की भी योजना है, जो भविष्य के युद्ध और निगरानी के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। सरहद से लेकर समंदर तक इमरजेंसी रनवे का यह जाल बिछाने का मुख्य कारण यह है कि किसी भी विषम परिस्थिति में वायुसेना की मारक क्षमता पर कोई असर न पड़े और भारतीय सेना हर समय मुस्तैद रहे।

