उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा को स्वच्छ और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि यात्रा मार्गों और जिलों के प्रवेश द्वारों पर सफाई की पुख्ता व्यवस्था की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी और इसके लिए जिलों को अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को इस बजट का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा है ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिल सके और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
कचरा प्रबंधन के लिए बनेगा ‘कंप्लीट मैकेनिज्म’
मुख्य सचिव ने प्रदेश में कचरा प्रबंधन को लेकर एक विस्तृत कार्ययोजना और ‘कंप्लीट मैकेनिज्म’ तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कूड़ा उठाने वाले वाहनों की शत-प्रतिशत निगरानी की जाए, जिसके लिए ‘व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम’ को जल्द से जल्द सक्रिय किया जाएगा। इसके साथ ही, वेस्ट-टू-एनर्जी और बायोगैस प्लांट्स के संचालन में तेजी लाने पर जोर दिया गया है ताकि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा हो सके।
सीवेज के उपचारित जल का होगा दोबारा उपयोग
जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देने के लिए मुख्य सचिव ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। उन्होंने अफसरों से कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से निकलने वाले उपचारित जल का अधिकतम उपयोग किया जाए। इस पानी का उपयोग बागवानी, सड़क की सफाई या अन्य गैर-घरेलू कार्यों में करने की योजना है, जिससे ताजे पानी की खपत को कम किया जा सके और यात्रा मार्गों पर स्वच्छता बनी रहे।

