पूरे देश की नजर उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर है..देश दुनिया से श्रद्धालु देवदर्शन की खातिर उत्तराखंड की ओर रुख कर रहे हैं। जिसके हृदय में श्रद्धा की ज्योति का उजाला हो उसकी राह में कोई भी सरकार रोड़ा क्यों अटकाएगी। लिहाजा बेधड़क तीर्थयात्री उत्तराखंड चले आ रहे हैं।
इनमें ज्यादातर ऐसे श्रद्धालु हैं जो पहली बार उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य का सफर कर रहे हैं। ऐसे में तय है कि मैदानी इलाकों के मंदिरों से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के तीर्थ धामो की तुलना नहीं की जा सकती। देवभूमि श्रद्धालु धामो का सफर इसलिए तय करता है कि उसकी सोच मानती है कि यहां देवताओं के दर्शन करना तपस्या है।
लिहाजा जो श्रद्धालु भक्तिभाव से चारों धामों की यात्रा कर रहा है उसके लिए तो कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि वो तीर्थाटन करने आया है पर्यटन करने नहीं। लेकिन जो पर्यटक धामों की यात्रा पर्यटन के नजरिए से कर रहा है वो रत्ती भर की तकलीफ को पहाड़ जैसा भार-भरकम करार दे रहा है।
चारधाम की आध्यात्मिक यात्रा पवित्र तो है ही उत्तराखंड के लिए उसकी आर्थिकी भी है। सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि कश्मीर और यूपी के सैकड़ों परिवारों की रोजी रोटी चार धाम यात्रा पर टिकी है। लिहाजा राज्य सरकार की पूरी कोशिश रहती है कि चारधाम की दिव्य यात्रा भव्य भी हो, किसी भी श्रद्धालु को कोई तकलीफ न हो।
बावजूद इसके शुरूआती दौर में न चाहकर भी कुछ चीजें छूट जाती हैं और सोशल मीडिया के दौर में हव्वा बन जाती हैं। सिर्फ ऐसे तबके की वजह से जिनकी रोटी ही सनसनी फैलाकर लाईक्स और शेयर से चलती है। इनको राज्य के इतिहास भूगोल का पता नहीं होता।
बहरहाल राज्य के डीजी सूचना और मुख्यमंत्री के अपर सचिव बंशीधर तिवारी तीर्थयात्रियों से गुजारिश करते हैं कि, धैर्य बनाए रखें क्योंकि पहाड़ी इलाका है, मंदिर हो या मंदिर का प्रांगण सभी में जगह कम है हजारों की तादाद में एक साथ भक्तों को दर्शन नहीं हो सकते।
साथ ही साथ डीजी सूचना तीर्थयात्रियों से स्वच्छता बनाए रखने की अपील भी करते हैं ताकि देवस्थान पॉलीथीन जैसे जहर से महफूज रहें। साथ ही साथ वे सभी श्रद्धालुओं से निवेदन भी करते हैं कि जो शासन ने व्यवस्था बनाई है उसका सम्मान करें ताकि हर भक्त को सलीके के साथ धामों में देवदर्शन हो सकें।

