देहरादून: दून अस्पताल में अब नहीं चलेगी लापरवाही, 14 कार्यवाहक एनएस संभालेंगे वार्डों की कमान

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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी स्थित दून अस्पताल में मरीजों की देखभाल में लगातार आ रही लापरवाही की शिकायतों के बाद अस्पताल प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। कभी लैब सैंपलों की अदला-बदली तो कभी तीमारदारों को रात में इमरजेंसी से ओपीडी के चक्कर लगवाने की घटनाएं सामने आ रही थीं। इन समस्याओं पर नकेल कसने के लिए अस्पताल में नया निगरानी ढांचा लागू करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

नियमों के तहत अब अस्पताल के हर पांच वार्डों की सीधी जिम्मेदारी एक कार्यवाहक असिस्टेंट नर्सिंग सुप्रीटेंडेंट को दी जाएगी। इसके आधिकारिक आदेश जल्द ही जारी कर दिए जाएंगे। दरअसल, दून अस्पताल में एनएस और नर्सिंग अधिकारियों के बीच खींचतान के बाद जांच कमेटी गठित की गई थी, जिसने कामकाज के बेहतर बंटवारे के लिए एनएस की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की थी।

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जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर एमएस डॉ. आरएस बिष्ट की कमेटी ने चार नए एनएस बनाने का फैसला लिया था, लेकिन वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों की आपत्ति के कारण मामला अटक गया था। इसके बाद गतिरोध समाप्त करने के लिए नया फार्मूला तैयार किया गया, जिसके तहत सभी 14 वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों को कार्यवाहक एनएस बनाकर उन्हें पांच-पांच वार्डों का जिम्मा सौंपने पर सहमति बन गई।

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अस्पताल में हाल ही में बलगम की जगह खून का सैंपल लिए जाने की गंभीर घटना के बाद सैंपल कलेक्शन की प्रक्रिया को भी सख्त कर दिया गया है। एमएस ने सभी वार्ड प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वार्ड बॉय सैंपल सीधे इमरजेंसी के कलेक्शन सेंटर पहुंचाएंगे। इसके बाद वहां तैनात कर्मचारी ही सैंपल को ओपीडी लैब तक सुरक्षित लेकर जाएगा।

अस्पताल प्रशासन को उम्मीद है कि 14 अधिकारियों की सीधी निगरानी से मरीजों के इलाज, तीमारदारों की समस्याओं और कर्मचारियों के रूटीन वर्क पर पैनी नजर रखी जा सकेगी। इस व्यवस्था से वार्डों के अंदर अनुशासन और चिकित्सा सेवाओं के स्तर में काफी सुधार आएगा। लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर अब सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।

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दून अस्पताल के एमएस डॉ. आरएस बिष्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि नए फार्मूले का आदेश जल्द ही जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि मरीजों के हित में पूरी ईमानदारी से काम करना होगा। यदि इसके बावजूद मरीजों की देखभाल में कोई ढिलाई पाई गई, तो संबंधित अधिकारी को तुरंत जिम्मेदारी से हटा दिया जाएगा।