उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए अब उत्तर-पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मौजूदा सेमेस्टर से ही ऑनस्क्रीन डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनेगी। इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल कॉपियों के परिवहन पर होने वाले भारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि मैनुअल चेकिंग में होने वाली देरी भी खत्म होगी, जिससे छात्रों के परीक्षा परिणाम समय पर और अधिक सटीक तरीके से घोषित किए जा सकेंगे।
पारंपरिक व्यवस्था की चुनौतियों का समाधान और दक्षता
वर्तमान में प्रचलित पारंपरिक और भौतिक मूल्यांकन प्रणाली में अक्सर पारदर्शिता की कमी, पुनर्मूल्यांकन में होने वाली देरी और उत्तर-पुस्तिकाओं के सुरक्षित रखरखाव जैसी कई गंभीर समस्याएं सामने आती रही हैं। इन चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने डिजिटल तकनीक को अपनाने का फैसला किया है, जिससे मूल्यांकन की गति तेज होगी और मानवीय गलतियों की संभावना न्यूनतम रह जाएगी। डिजिटल फॉर्मेट में डेटा सुरक्षित होने के कारण भविष्य में रिकॉर्ड खोजना भी आसान होगा।
हरिद्वार के मदरसों में जांच और अनियमितताओं पर कार्रवाई
शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता के एक अन्य मामले में, हरिद्वार जिले के 131 मदरसों की प्रारंभिक जांच के दौरान 23 संस्थानों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं पाई गई हैं। पीएम पोषण योजना के तहत की गई इस जांच में सामने आया है कि 11 मदरसों में योजना का संचालन ही बंद था, जबकि अन्य में छात्रों की संख्या, उपस्थिति और वित्तीय लेखा-जोखा में भारी गड़बड़ियां मिली हैं। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रथम चरण की रिपोर्ट के आधार पर संदिग्ध पाए गए मदरसों की मार्च और अप्रैल माह की धनराशि पर फिलहाल रोक लगा दी है। डीईओ बेसिक अमित चंद ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

