चम्पावत पुलिस ने हाल ही में क्षेत्र में हुई एक कथित गैंगरेप की घटना को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। पुलिस अधीक्षक रेखा यादव के अनुसार, सल्ली गांव में बुधवार को एक 16 वर्षीय किशोरी के हाथ-पैर बंधे मिलने के बाद सनसनी फैल गई थी, लेकिन जांच के दौरान यह पाया गया कि यह पूरा मामला राजनीतिक रंजिश के कारण रचा गया था। पुलिस का दावा है कि पूर्व बीडीसी सदस्य कमल रावत ने निजी बदले की भावना से इस साजिश को अंजाम दिया और किशोरी को इलाज व अन्य प्रलोभन देकर इस मामले में शामिल किया। सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ है कि जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे, वे घटना के समय वहां मौजूद ही नहीं थे।
मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता का बयान
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. देवेश चौहान ने पुष्टि की कि किशोरी की मेडिकल जांच में दुष्कर्म या किसी भी प्रकार के शारीरिक शोषण की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त, एसपी ने जानकारी साझा की है कि पीड़िता ने स्वयं मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए अपने बयानों में आरोपियों की संलिप्तता से इनकार कर दिया है। पुलिस की इस प्रेस वार्ता के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि पूर्व भाजपा नेता को फंसाने के लिए यह झूठा मामला तैयार किया गया था, जिसके कारण शुरुआती जांच में दर्ज किए गए दावों पर अब संदेह की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

