दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) आगामी 10 मई से बागपत क्षेत्र में टोल वसूली की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते 14 अप्रैल को उद्घाटन किए गए इस आधुनिक एक्सप्रेसवे पर गुरुवार से टोल वसूली का ट्रायल भी सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है। बागपत जिले के 31 गांवों से होकर गुजरने वाला यह कॉरिडोर क्षेत्र में 42.8 किलोमीटर का हिस्सा कवर करता है, जो इस पूरे प्रोजेक्ट का एक बड़ा भाग है। इस मार्ग के चालू होने से दिल्ली से देहरादून की दूरी और समय में काफी कमी आई है, जिससे यात्रियों को सुगम सफर का अनुभव मिल रहा है।
एक्सप्रेसवे पर गति सीमा और यातायात के कड़े नियम
सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए एनएचएआई ने इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति सीमा निर्धारित कर दी है, जिसके तहत कारों के लिए अधिकतम रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। वहीं, बसों के लिए यह सीमा 90 और भारी वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। नियमों को कड़ाई से लागू करते हुए प्राधिकरण ने दोपहिया वाहनों, थ्री-व्हीलर और ट्रैक्टरों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है ताकि एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार यातायात बाधित न हो और दुर्घटनाओं का खतरा कम रहे।
प्रमुख इंटरचेंज और सफर की आसान राह
एक्सप्रेसवे पर वाहनों के प्रवेश और निकास के लिए बागपत क्षेत्र में व्यवस्थित इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिसमें टटीरी और बिजरौल जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। मवीकलां गांव के पास ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून हाईवे का मुख्य जंक्शन बनाया गया है, जहाँ से देहरादून की दूरी मात्र 179 किलोमीटर रह जाती है। इस जंक्शन से हाईवे पर प्रवेश करने के बाद यात्री महज दो घंटे के भीतर देहरादून पहुंच सकते हैं। बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन भी इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जिससे दिल्ली से सहारनपुर और उत्तराखंड की कनेक्टिविटी पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो गई है।

