उत्तराखंड के चाय बागानों में लहलहाएगी असम चाय बागानों की सीख, पढ़िए पूरी खबर

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उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी राज्य में चाय उद्योग की तस्वीर बदलने और विपणन व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के संकल्प के साथ पांच दिवसीय असम दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस महत्वपूर्ण यात्रा का मुख्य उद्देश्य असम की उन्नत चाय उत्पादन तकनीकों और वहां की सफल मार्केटिंग प्रणालियों को समझना है, ताकि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पैदा होने वाली चाय की गुणवत्ता और उसके व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके। मंत्री जोशी के नेतृत्व में गया यह उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल असम के विश्व प्रसिद्ध चाय बागानों का बारीकी से अध्ययन करेगा और वहां के सफल मॉडल को उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की संभावनाएं तलाशेगा।

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चाय उत्पादन तकनीक का गहन अध्ययन

इस पांच दिवसीय दौरे के दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी असम के प्रमुख चाय बागानों और प्रसंस्करण इकाइयों का दौरा करेंगे, जहाँ वे चाय की पैदावार बढ़ाने से लेकर उसे पैक करने और बाजार तक पहुंचाने की आधुनिक प्रणालियों का विश्लेषण करेंगे। जोशी वहां के स्थानीय चाय उत्पादकों, बड़े निर्यातकों और कृषि विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करेंगे ताकि उत्तराखंड में चाय की गुणवत्ता सुधारने और उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार करने के लिए ठोस सुझाव प्राप्त किए जा सकें। इस अध्ययन का सीधा लाभ उत्तराखंड के उन काश्तकारों को मिलेगा जो पारंपरिक खेती के साथ-साथ चाय उत्पादन से जुड़कर अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं।

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विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों का साझा मिशन

कृषि मंत्री के साथ इस दौरे पर एक मजबूत प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है, जिसमें विधायक अनिल नौटियाल और महेश जीना जैसे जनप्रतिनिधि राज्य की पैरवी कर रहे हैं। इनके अलावा तकनीकी मार्गदर्शन के लिए चाय बोर्ड के उपाध्यक्ष महेश्वर सिंह महरा, कृषि सचिव डॉ. एस.एन. पाण्डेय, चाय विकास बोर्ड के निदेशक महेंद्र पाल और प्रगतिशील किसान बसंत जोशी भी इस टीम का हिस्सा हैं। यह टीम प्रशासनिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं पर काम कर रही है, ताकि असम से मिली सीख को उत्तराखंड के धरातल पर उतारते समय सरकारी नीतियों और किसानों की जरूरतों के बीच एक बेहतर तालमेल बिठाया जा सके।