उत्तराखंड में ‘जन विश्वास विधेयक’ अब कानून के रूप में प्रभावी हो गया है, जिसके तहत सात अलग-अलग विभागों के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य छोटे अपराधों में जेल की सजा को कम करना या खत्म करना है, लेकिन इसके बदले जुर्माने की राशि को काफी बढ़ा दिया गया है। विशेष रूप से पर्यावरण, कृषि और गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन पर सरकार ने अब अधिक सख्ती बरतने का फैसला किया है।
नर्सरी संचालकों पर कसा शिकंजा
उत्तराखंड फल नर्सरी विनियमन अधिनियम 2019 के तहत अब घटिया किस्म के पौधे बेचने वाले नर्सरी संचालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। पहली बार गलती पाए जाने पर यह जुर्माना 1 लाख से 5 लाख रुपये तक होगा, जबकि दूसरी बार दोषी पाए जाने पर इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक किया जा सकता है। इसके अलावा, जुर्माना न भरने की स्थिति में 1,000 रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त दंड भी देना होगा।
जैविक खेती और अन्य कानूनों में बड़े बदलाव
- जैविक खेती: जैविक घोषित क्षेत्रों में रासायनिक खाद या प्रतिबंधित सामग्री बेचने पर अब 50 हजार से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा, हालांकि इसमें जेल की सजा का प्रावधान हटा दिया गया है।
- प्लास्टिक कचरा नियम: उत्तराखंड प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा विनियमन अधिनियम के तहत जेल की सजा को तीन महीने से घटाकर एक महीना कर दिया गया है।
- आरक्षण अधिनियम: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लोक सेवा आरक्षण अधिनियम के तहत जुर्माने की राशि को 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया गया है।
- अवैध निर्माण: नदी क्षेत्रों में अवैध निर्माण करने पर 5 हजार रुपये जुर्माना और निरंतर उल्लंघन पर 1,000 रुपये रोज का अतिरिक्त जुर्माना तय किया गया है।
सजा की जगह जुर्माने पर जोर
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, इस कानून के जरिए सरकार का ध्यान दंड के बजाय नियमों के पालन पर है। कई मामलों में जेल जाने के डर को खत्म किया गया है ताकि व्यवस्था सरल बनी रहे, लेकिन गंभीर पर्यावरणीय अपराधों के लिए अभी भी 20 हजार रुपये जुर्माना या दो माह की जेल अथवा दोनों सजाओं का प्रावधान रखा गया है।

