उत्तराखंड आपदा राहत: केंद्र से 15,000 करोड़ की डिमांड, अभी तक फूटी कौड़ी नहीं

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उत्तराखंड में इस बार मानसून ने जमकर कहर ढाया, जिससे प्रदेश में जाम-माल के साथ कई बड़े नुकसान भी हुए। उत्तराखंड में मानसून से हुए नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से मदद की गुहार भी लगाई थी, हालांकि, राज्य में आपदा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया था तो उन्होंने उस दौरान उत्तराखंड को एक बड़ा राहत पैकेज देने की बात कही थी और साथ ही उत्तराखंड के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद करने का आश्वासन भी दिया था। वहीं मौजूदा समय की स्थिति यह है कि मानसून को बीते खासा समय बीत चुका है, मगर अभी तक केंद्र सरकार की सहायता राज्य सरकार तक नहीं पहुंची है।

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दरअसल, राज्य सरकार ने पहली बार पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट करने की बात रखी थी, जिसका कार्य अब जाकर समाप्त हुआ है। यही कारण भी है कि केंद्र सरकार की ओर से सहायता अभी तक राज्य को प्राप्त न हो सकी। वहीं असेसमेंट का कार्य समाप्त होने के बाद अब राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विभाग को 15000 करोड़ की रिपोर्ट भेजी है।

उत्तराखंड कांग्रेस ने उठाया राहत देरी का मुद्दा


उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अब तक लगभग 7.30 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जैसै-जैसे केंद्र सरकार की ओर से सहायता राशि आती रहेगी उसे आवश्यक्तानुसार अलग-अलग मदों में हिसाब से खर्च किया जाएगा, चूंकि मानसून और आपदाओं को बीते खासा वक्त हो चला है और अभी तक केंद्र सरकार की ओर से सहायता राशि का न पहुंचना कई बड़े सवालों को जन्म दे रहा है। इसी क्रम में विपक्ष ने भी राज्य और केंद्र सरकार पर प्रश्नचिह्म लगाने शुरु कर दिए हैं।

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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मुद्दे पर सीधा हमला करते हुए कहा कि यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपदा को हुए एक लंबा समय बीत चुका है और अभी तक केंद्र सरकार ने अपनी पैकेज घोषणा के तहत राज्य सरकार को धनराशि नहीं दी है। यह बात केंद्र सरकार की आपदा के प्रति असंवेदनशील व्यवहार को दर्शाती है, चूंकि उत्तराखंड में 6 महीनों के बाद फिर मानसून की वापसी होने जा रही है और उत्तराखंड में दोबारा ऐसी ही परिस्थितियां बनेंगी, मगर जब केंद्र सरकार द्वारा पिछला कार्य ही पूर्ण न हो पाया तो आगामी चुनौतियों से निपटान के लिए केंद्र सरकार से क्या ही उम्मीद रखी जा सकती है !