देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर टिकट की दौड़ अभी से तेज हो गई है। राज्य की कई सीटों पर एक-एक टिकट के लिए पांच से सात दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं, जिससे आने वाले महीनों में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ना तय है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, टिहरी, यमकेश्वर, डोईवाला, धनोल्टी, केदारनाथ और प्रतापनगर जैसी प्रमुख विधानसभा सीटों पर टिकट के सबसे अधिक दावेदार सामने आ रहे हैं। इतने मजबूत दावेदारों की मौजूदगी से पार्टी नेतृत्व के लिए प्रत्याशियों का चयन करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
पार्टी की रणनीति के अनुसार, जिन सीटों पर अभी भाजपा के विधायक हैं, वहां सबसे पहले वर्तमान विधायक को ही तवज्जो दी जाएगी। हालांकि, यदि आंतरिक सर्वे में किसी विधायक की स्थिति बेहद कमजोर पाई जाती है, तो ही टिकट में बदलाव का निर्णय लिया जाएगा।
भाजपा ने अगले विधानसभा चुनाव में राज्य में जीत की हैट्रिक लगाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पार्टी ग्रास रूट स्तर पर सर्वे कराकर दावेदारों का जनाधार आंक रही है, ताकि हर क्षेत्र में केवल जिताऊ चेहरे को ही मैदान में उतारा जाए।
संगठनात्मक स्तर पर भी प्रत्याशियों को लेकर लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। हाल ही में हुई संसदीय सीटवार बैठकों में जिला स्तर के संगठन ने दावेदारों के नामों पर विस्तार से चर्चा की है और जिलाध्यक्षों ने हर सीट का ब्योरा नेतृत्व को सौंप दिया है।
पार्टी का विशेष फोकस पिछले चुनावों में हारी हुई सीटों को जीतने पर है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि पार्टी का लक्ष्य सभी सीटें जीतना है, लेकिन हारी हुई सीटों पर सबसे मजबूत प्रत्याशियों की पहचान के लिए जिला, मंडल और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है।
हारी हुई सीटों पर रायशुमारी और सर्वे के जरिए सबसे लोकप्रिय चेहरों की तलाश जारी है। इसके लिए पार्टी के सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को भी मैदान में उतारा जा चुका है ताकि इन क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत की जा सके।
प्रत्याशियों के चयन पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया कि टिकट पर अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड ही करेगा। फिलहाल सर्वे का काम चल रहा है और पहले चरण में हारी हुई सीटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

