नई दिल्ली। आज (सोमवार) से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में ऐसे संकेत मिले हैं कि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम केंद्र सरकार का साथ दे सकती है। अगर ऐसा होता है तो इसे विपक्षी एकजुटता के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
सर्वदलीय बैठक के बाद आरएसपी सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि डीएमके परिसीमन विधेयक पर सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार है। हालांकि, डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी दक्षिण भारत के राज्यों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।
वहीं, राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक पर्दे के पीछे इस मुद्दे पर सहमति लगभग बन चुकी है। डीएमके की मांग है कि परिसीमन में सभी राज्यों की सीटें आनुपातिक रूप से 50 फीसदी बढ़ाई जाएं। खबर है कि सरकार इस मांग को बिल में शामिल करने के लिए तैयार हो गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी बजट सत्र के दौरान इस पर सकारात्मक आश्वासन दिया था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस सर्वदलीय बैठक में मानसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने पर चर्चा हुई। सत्र के पहले ही दिन सरकार 5 महत्वपूर्ण नए विधेयक पेश करने जा रही है, जो देश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने से जुड़े हैं।
पहले दिन पेश होने वाले विधेयकों में ‘आयकर विधेयक’ शामिल है, जिसका मकसद विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना और सरकारी कर्ज बाजार को मजबूत करना है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले अध्यादेश को स्थायी कानून बनाने के लिए भी विधेयक लाया जा रहा है।
सांस्कृतिक और कानूनी दृष्टिकोण से ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण विधेयक’ बेहद खास है, जिसमें राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने वालों पर कड़े दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। साथ ही, ‘जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण बिल’ और एमएसएमई सेक्टर में बकाए के त्वरित निपटारे से जुड़ा संशोधन विधेयक भी आज पटल पर रखा जाएगा।

