दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेवे पर वाहन चालकों के पांव ब्रेक पर नहीं पड़ते। जूं-फूं हवा-हवाई सफर…. दिल्ली में जो पांव एक्सीलेटर रखे सीधे देहरदून के आशारोड़ी पहुंचने पर ही हटते हैं। दिल्ली से देहरादून के बीच 213 किलोमीटर का सफर महज ढाई घंटे में पूरा हो जाता है। लेकिन अगर उस दिल्ली वाले भैजी को देहरादून के जोगीवाला जाना होगा तो बिना एसी की गाड़ी में पसीने से लथक-पथ हो जाएगा। जी हां दिल्ली से आशारोड़ी पहुंचना जितना आसान है, आशारोड़ी से जोगीवाला पहुंचना उतना ही कठिन।
आशोरोड़ी से जोगीवाला के बीच जो 13 किलोमीटर का सफर है उसे पूरा करने में डेढ से पौने दो घंटे लग रहे हैं। दिल्ली से देहरादून तो आसानी से पहुंचा जा रहा है लेकिन देहरादून के भीतर सफर मुश्किल हो रहा है। बढ़ती आबादी और घर-घर वाहन ने देहरादून की सड़कों को बोतल की गर्दन बना दिया है।
आशारोड़ी से जोगीवाला पहुंचने तक कई जाम प्वाइंट वाहन की रफ्तार को कछुवा चाल में तब्दील कर देते हैं। जिसके चलते सफर का जो लुत्फ मुसाफिर ने दिल्ली से देहरादून पहुंचने में उठाया था..देहरादून के भीतर पहुंचने पर उसका मजा किरकिरा हो जाता है। लिहाजा जरूरत है शहर के भीतर की भाग्यरेखाओं को दुरस्त करने की ताकि डी.डी.एक्सप्रेसवे का मजा दून के भीतर भी जिंदा रहे और उत्तराखंड आने वाले अतिथि गुनगुनाते रहें, “हवा के साथ साथ-घटा के संग संग, ओ साथी चल यूं ही दिन रात चल तू…. ।”

