देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के राजपुर रोड इलाके में ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर एक महिला से 25 लाख रुपये की साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। राजपुर रोड निवासी पीड़िता प्रेम वंदना लिम्बू की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने सावेक्सा प्लेटफॉर्म के संचालकों, विदेशी मोबाइल नंबरों से संपर्क करने वाले अज्ञात साइबर ठगों और धनराशि प्राप्त करने वाले बैंक खाताधारकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के अनुसार, पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, यह पूरा मामला जनवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब पीड़िता प्रेम वंदना लिम्बू ने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा था। इस विज्ञापन में मात्र 25 हजार रुपये निवेश कर घर बैठे एक से ढाई लाख रुपये तक कमाने का बड़ा दावा किया गया था। विज्ञापन से प्रभावित होकर पीड़िता ने सावेक्सा नाम के ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर अपना एक खाता बनाया, जिसके बाद वह शातिर ठगों के जाल में फंसती चली गईं।
अकाउंट बनाने के बाद पीड़िता के पास सबसे पहले खुद को फैजल बताने वाले एक व्यक्ति का कॉल आया, जिसने उनसे दो बार में 25-25 हजार रुपये का निवेश कराया। साइबर ठगों ने पीड़िता का भरोसा जीतने के लिए उनके बैंक खाते में 20 अमेरिकी डॉलर की विड्रॉल भी कराई। शुरुआती सफलता और विश्वास बहाली के बाद इस खेल में ‘जैन’ नाम के एक अन्य व्यक्ति की एंट्री हुई, जिसने बड़े मुनाफे का लालच देकर उनसे लाखों रुपये निवेश करा दिए।
जब पीड़िता ने निवेश की गई रकम और मुनाफे को निकालना चाहा, तो ठगों ने नया पैंतरा चलते हुए बताया कि उनके खाते पर स्वाइप चार्जेस लग रहे हैं। इन चार्जेस से बचने के लिए उन्हें और पैसा जमा करना होगा। ठगों के झांसे में आकर पीड़िता ने लगातार रकम जमा करना जारी रखा। इसके बाद +44 कंट्री कोड वाले कई विदेशी नंबरों से लगातार कॉल आने लगे और उन्हें टेलीग्राम पर कथित अकाउंट मैनेजरों से जोड़ दिया गया।
कुछ समय बाद तैमूर नाम के एक अन्य व्यक्ति ने पीड़िता का अकाउंट संभालते हुए उन्हें पूरा भरोसा दिलाया कि उनकी पूरी धनराशि वापस दिला दी जाएगी। इसी भरोसे के आधार पर पीड़िता उस समय तक करीब 17 लाख रुपये का निवेश कर चुकी थीं। इसके बाद ठगों ने सेटलमेंट एग्रीमेंट के नाम पर उनसे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और उनके ट्रेडिंग खाते में 5,000 अमेरिकी डॉलर दिखाए, लेकिन इसके बावजूद निकासी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
इसके बाद हसीब नाम के एक व्यक्ति ने खुद को सेटलमेंट अधिकारी बताते हुए पीड़िता से संपर्क किया। हसीब ने दावा किया कि पूरी राशि रिलीज कराने के लिए उन्हें 8,000 अमेरिकी डॉलर के बराबर अतिरिक्त धन जमा करना होगा। लगातार आ रहे फोन, ई-मेल और आश्वासनों के दबाव में आकर पीड़िता ने 26 जून को RTGS के जरिए 8 लाख रुपये और भेज दिए। हालांकि, बैंक से सत्यापन कॉल आने के बाद भी उनके खाते में कोई रकम वापस नहीं पहुंची।
ठगी का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका; इसके बाद एक अन्य महिला ने गोल्डन अकाउंट अपग्रेड करने के नाम पर करीब 15,000 अमेरिकी डॉलर और जमा करने की मांग की। लगातार अतिरिक्त पैसों की मांग किए जाने पर आखिरकार पीड़िता को यह अहसास हुआ कि उनके साथ सुनियोजित तरीके से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 25 लाख रुपये की बड़ी ठगी की जा चुकी है। पीड़िता की तहरीर पर अब साइबर पुलिस पूरे मामले की सघन जांच कर रही है।

