नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को नए टेलीविजन रेटिंग्स नियम-2026 के तहत पंजीकरण पूरा होने तक सभी प्रकार के टीवी चैनलों की रेटिंग प्रकाशित करने से तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। सरकार का यह आदेश समाचार और मनोरंजन, खेल आदि दोनों श्रेणियों के टीवी चैनलों पर समान रूप से लागू होगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी इन नए दिशानिर्देशों का सीधा असर देश के सभी टीवी नेटवर्क्स और रेटिंग व्यवस्था पर पड़ने वाला है।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस नए फैसले से पहले सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान बीते 6 मार्च को केवल न्यूज चैनलों की रेटिंग जारी करने पर रोक लगाई थी। हालांकि, अब इस दायरे को बढ़ाते हुए खेल और मनोरंजन सहित सभी श्रेणियों के टीवी चैनलों की रेटिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। मार्च के महीने में लागू की गई इस नई नीति ने साल 2014 की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से रिप्लेस यानी प्रतिस्थापित कर दिया है।
सरकारी आदेशों और नए नियमों के महत्व को स्पष्ट करते हुए अधिकारियों ने बताया कि बार्क (BARC) वर्तमान में देश की एकमात्र टीवी ऑडियंस मापन एजेंसी है। इस एजेंसी द्वारा जारी किए जाने वाले साप्ताहिक दर्शक आंकड़े ही देश में विज्ञापन वितरण, मीडिया प्लानिंग और विभिन्न टीवी कार्यक्रमों के मूल्यांकन का मुख्य आधार माने जाते हैं। रेटिंग रुकने से इस पूरे व्यवसाय और विज्ञापन चक्र पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, टेलीविजन रेटिंग्स नियम की धारा 14.2 के तहत अब सख्त प्रावधान किए गए हैं। इन प्रावधानों के मुताबिक, देश में क्रियाशील कोई भी रेटिंग एजेंसी जब तक नए नियमों के अनुरूप अपना पंजीकरण और लाइसेंस प्राप्त नहीं कर लेती, तब तक वह टीवी रेटिंग तैयार या उसे सार्वजनिक रूप से प्रकाशित नहीं कर सकती है। यह कदम देश में रेटिंग प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए उठाया गया है।
सरकार की नई नीति में रेटिंग के तौर-तरीकों और योग्यता मानकों में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के अंतर्गत अब लैंडिंग पेज के दर्शकों की संख्या को टेलीविजन रेटिंग की गणना से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसके अतिरिक्त, रेटिंग एजेंसियों के संचालन के लिए तय की गई न्यूनतम नेटवर्थ की अनिवार्य जरूरत को भी बेहद कम कर दिया गया है। पहले जहां इसके लिए 20 करोड़ रुपये की नेटवर्थ आवश्यक थी, वहीं अब इसे घटाकर मात्र 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, प्रवेश मानदंडों में दी गई इस ढील और वित्तीय शर्तों को आसान बनाने के पीछे एक विशेष रणनीतिक उद्देश्य है। सरकार के इस कदम से देश के दर्शक प्रबंधन व्यवसाय में कई नई कंपनियों के प्रवेश करने के लिए रास्ते खुल गए हैं। बार्क की एकाधिकार को चुनौती देने और बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए इन पात्रता नियमों को सरल बनाया गया है।
इस प्रकार, केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए टेलीविजन रेटिंग्स नियम-2026 ने मीडिया इंडस्ट्री के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। बार्क को अब रेटिंग्स की बहाली के लिए जल्द से जल्द नए नियमों के मुताबिक पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। जब तक यह प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक देश के किसी भी टीवी चैनल का साप्ताहिक परफॉर्मेंस डेटा और रेटिंग्स का प्रकाशन पूरी तरह से स्थगित रहेगा।

