देहरादून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत उत्तराखंड के चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र को एक बहुत बड़ी वित्तीय मजबूती मिली है। सूबे की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को गति देने के लिए केंद्र सरकार से कुल 600 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी मिल गई है। इस बड़े फैसले का सीधा असर राज्य के आम नागरिकों और विशेषकर सुदूरवर्ती दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों पर पड़ेगा, जिन्हें अब बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
वित्तीय मोर्चे पर राज्य सरकार को यह बड़ी कामयाबी केंद्रीय स्तर पर किए गए प्रशासनिक प्रयासों के बाद हासिल हुई है। केंद्र सरकार की ओर से नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के संचालन के लिए स्वीकृत की गई कुल राशि में से 235 करोड़ रुपये की पहली किश्त भी विधिवत रूप से जारी कर दी गई है। इस पहली किश्त के आने से प्रदेश में जारी और नई स्वास्थ्य परियोजनाओं को समय पर धरातल पर उतारने में बड़ी मदद मिलेगी।
आधिकारिक सूत्रों और प्राप्त विवरण के अनुसार, बीते दिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने मजबूती के साथ राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े तमाम अहम प्रस्तावों को केंद्र के समक्ष उठाया था। स्वास्थ्य मंत्री के इन्हीं प्रयासों के बाद केंद्र ने इस बड़े प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगाई है।
बैठक के बाद विस्तृत जानकारी साझा करते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत इस 600 करोड़ रुपये के बड़े बजट को हरी झंडी दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भारी-भरकम राशि के आवंटित होने से प्रदेश भर के लोगों को पहले के मुकाबले कहीं अधिक बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
प्रदेश सरकार का मुख्य ध्यान इस समय राज्य के उन हिस्सों पर केंद्रित है जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चिकित्सा बुनियादी ढांचा कमजोर है। स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी और मुख्य प्राथमिकता राज्य के दुर्गम एवं पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ चिकित्सा सेवाओं को पूरी तरह चाक-चौबंद करना है।
इस बड़े बजट की मदद से उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों के अस्पतालों में जरूरी दवाओं, आधुनिक उपकरणों और स्वास्थ्य कर्मियों से जुड़ी मूलभूत आवश्यकताओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। इसके साथ ही प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की दशा सुधारने में भी इस राशि का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया जाएगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच हुए इस समन्वय को उत्तराखंड के चिकित्सा इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती दौर में ही पहली किश्त के रूप में 235 करोड़ रुपये मिलना इस बात का संकेत है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण को लेकर कितनी गंभीर है। स्वास्थ्य विभाग जल्द ही इस राशि के सुचारू उपयोग के लिए अपनी विस्तृत कार्ययोजना को धरातल पर लागू करने जा रहा है।

