पहाड़ के सर्पीले रास्तों पर ‘संजीवनी’ बनी 108 सेवा: चलती एम्बुलेंस के भीतर गूंजी 3 नन्ही किलकारियां

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पौड़ी। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में खराब भौगोलिक परिस्थितियों और सुदूर इलाकों से अस्पताल दूर होने की लाचारी के बीच 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा ग्रामीणों के लिए जीवन की डोर थामने वाली ‘संजीवनी’ साबित हो रही है। पौड़ी जिले में इसी सेवा ने पिछले एक सप्ताह के भीतर तीन अलग-अलग प्रसूताओं (माताओं) और उनके नवजातों को अस्पताल पहुंचने के मुश्किल सफर के बीच सुरक्षित प्रसव करवाकर नई जिंदगी दी है।

थलीसैंण, पोखड़ा और नैनीडांड ब्लॉक में गूंजी किलकारियां

आपातकालीन स्थिति में 108 एम्बुलेंस का स्टाफ ही संकटमोचक बनकर दाई मां की भूमिका में आ गया। उनके प्रयासों से बीते एक सप्ताह में पौड़ी जिले के अलग-अलग तीन कोनों में तीन नन्ही किलकारियां गूंज उठीं। थलीसैंण, पोखड़ा और नैनीडांड विकास खंड की तीन अलग-अलग प्रसूताओं ने अस्पताल के प्रसव कक्ष पहुंचने से पहले ही चलती हुई एम्बुलेंस गाड़ी के भीतर स्वस्थ नवजातों को जन्म दिया। राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि अब तीनों माताएं और उनके बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित हैं। इनमें से दो परिवारों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि एक जच्चा-बच्चा अभी डॉक्टरों की देखरेख में उपचाराधीन हैं।

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25 जून की सुबह: जब एम्बुलेंस ही बन गई ‘प्रसव कक्ष’

इस पूरी श्रृंखला में विकासखंड थलीसैंण के अंतर्गत कुचोली गांव के निवासी गोपाल सिंह की पत्नी बीना देवी को बीते 25 जून की सुबह तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। परिजनों ने बिना समय गंवाए तुरंत 108 आपातकालीन सेवा से संपर्क साधा और एम्बुलेंस फौरन गांव पहुंच गई।

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दौराने सफर, रास्ते में ही प्रसूता की स्थिति अत्यधिक बिगड़ने लगी और प्रसव का दर्द सहन से बाहर हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वाहन में तैनात ईएमटी (Emergency Medical Technician) विनय नेगी ने अद्भुत सूझबूझ दिखाई। उन्होंने मौके पर मौजूद आशा कार्यकर्ता शाखा देवी के सहयोग से एम्बुलेंस वाहन के भीतर ही प्रसव कराने का सुरक्षित प्रयास शुरू किया। दोनों की कड़ी मेहनत और कुशलता के चलते गाड़ी के भीतर ही सामान्य प्रसव संपन्न कराया गया, जिससे जच्चा-बच्चा दोनों की जान बच सकी।