देहरादून। राजधानी देहरादून के सभी स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अब नियमित पढ़ाई के साथ एंटी-ड्रग्स, साइबर क्राइम और वित्तीय अपराध से संबंधित विषय भी पढ़ाए जाएंगे। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शुक्रवार को जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक में इसके कड़े निर्देश जारी किए हैं।
डीएम ने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ यह जंग सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और परिवारों की सुरक्षा का संकल्प है।
हॉस्टल-PG में लगेंगे CCTV, हेल्पलाइन 1933 का प्रचार
केमिकल और ई-ड्रग्स के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए डीएम ने एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस और एनसीबी को संयुक्त कार्रवाई कर ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ने के आदेश दिए हैं।
अब जिले के सभी हॉस्टलों, पीजी आवासों और कोचिंग सेंटरों में सीसीटीवी से निगरानी रखी जाएगी। साथ ही एंटी-ड्रग्स हेल्पलाइन नंबर 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
GIS मैपिंग से चिन्हित होंगे नशा तस्करी के ‘हॉटस्पॉट’
तस्करों पर नकेल कसने के लिए पुराने अपराध आंकड़ों का जीआईएस विश्लेषण किया जा रहा है। जीआईएस मैपिंग के जरिए अति संवेदनशील और ‘हॉटस्पॉट’ इलाकों को चिन्हित कर वहां अचानक छापेमारी की जाएगी।
स्कूल-कॉलेजों के आसपास, चाय-तंबाकू की ठेलियों, स्लम बस्तियों और मेडिकल स्टोर्स पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी।
23 नशा मुक्ति केंद्र मिले बंद, 15 पर गिरी गाज
बैठक में जिले के नशा मुक्ति केंद्रों की जांच रिपोर्ट भी पेश की गई। भौतिक सत्यापन के दौरान जिले में 84 पंजीकृत और 2 गैर-पंजीकृत नशा मुक्ति केंद्र चिन्हित किए गए थे।
जांच के दौरान 23 केंद्र मौके पर बंद पाए गए, जबकि 15 चालू केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है।

