उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों में मजबूत होगी सुरक्षा और कनेक्टिविटी, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

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देहरादून। उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों का नक्शा बदलने और वहां पलायन रोकने के लिए राज्य सरकार ने ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सोमवार को देहरादून सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति की बैठक में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने निर्देश दिए कि कार्यक्रम के तहत हर संबंधित जनपद से पांच-पांच बड़े और रणनीतिक प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाएं।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के फेज-1 और फेज-2 की परियोजनाओं को चुनते समय सीमावर्ती क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों का ध्यान रखा जाए। इन प्रस्तावों में सड़क कनेक्टिविटी, विद्युत ग्रिड, मोबाइल नेटवर्क, टीवी और संचार सुविधाओं के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन और आजीविका को बढ़ावा देने वाले प्रोजेक्ट्स को पहली प्राथमिकता दी जाएगी।

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बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी दिया गया कि सीमांत क्षेत्रों में तैनात भारतीय सेना, सशस्त्र सीमा बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस से जुड़े आवश्यक विकास प्रस्तावों को भी वाइब्रेंट विलेज योजना में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इससे न केवल स्थानीय ग्रामीणों को सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि सीमावर्ती सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।

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मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों को ‘प्राथमिकता के घटते क्रम’ में तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों की स्थानीय जरूरतों के आधार पर प्राथमिकता सूची बनाएं, ताकि सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण काम सबसे पहले मंजूर हो सकें।

वित्तीय संसाधनों के सही उपयोग पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि जिन विकास कार्यों के लिए केंद्र या राज्य सरकार की अन्य योजनाओं से बजट मिल सकता है, उन्हें उन्हीं योजनाओं से पूरा कराया जाए। ऐसी परियोजनाओं को वाइब्रेंट विलेज की सूची से हटाकर उनके स्थान पर अन्य नई और अति-आवश्यक योजनाओं को जोड़ा जाएगा।

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सचिवालय में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, डीजी अभिनव कुमार, सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, सी. रविशंकर, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भरणे सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

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