देहरादून। राजधानी देहरादून के काठबंगला क्षेत्र में रिस्पना नदी किनारे बने 116 आवास पूरी तरह तैयार हैं। नगर निगम ने पात्र लाभार्थियों को फ्लैट नंबर भी आवंटित कर दिए हैं और शासन स्तर से मंजूरी मिले भी एक महीना बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद विस्थापित परिवारों को पक्के मकानों की चाबी नहीं मिल पाई है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब फ्लैट बनकर तैयार हैं, आवंटन हो चुका है और शासन से भी हरी झंडी मिल चुकी है, तो फिर प्रशासनिक स्तर पर किस बात का इंतजार किया जा रहा है? फाइलें आगे क्यों नहीं बढ़ पा रही हैं?
दरअसल, रिस्पना नदी के खतरे की जद में रहने वाले परिवारों को बसाने के लिए नगर निगम ने ये 116 आवास बनाए हैं। जिस जमीन पर यह कॉलोनी तैयार हुई है, वह मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के अधीन आती है।
यहीं पर पूरा पेंच फंसा हुआ है। एमडीडीए को अभी अपनी इस जमीन पर विधिवत कब्जा लेना है। जब तक प्राधिकरण जमीन पर कब्जा लेने की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं करता, तब तक लाभार्थियों को इन आवासों में शिफ्ट करने का रास्ता साफ नहीं हो सकता।
शासन से अनुमति मिले करीब एक महीने का वक्त गुजर जाने के बाद भी विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण प्रक्रिया ठप पड़ी है। नदी के किनारे खतरनाक जीवन जी रहे गरीब परिवार अब टकटकी लगाए बैठे हैं कि प्रशासनिक अमला कब कागजी कार्रवाई पूरी करे और उन्हें सुरक्षित आशियाना मिले।

