Dehradun: गौरवशाली इतिहास संजोएगा जिला प्रशासन, DM ने बनाई नई रणनीति

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देहरादून। दून घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल शुरू की है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में देहरादून, मसूरी और आसपास के क्षेत्रों के इतिहास का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने पर सहमति बनी। इस योजना के जरिए प्राचीन संदर्भों, दुर्लभ दस्तावेजों और सांस्कृतिक पहचान को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा।

बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि दून का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद व्यापक है, लेकिन अब तक इसे एकीकृत रूप में सहेजा नहीं जा सका था। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए इतिहास को नए सिरे से लिपिबद्ध करना और प्रामाणिक स्रोतों का संरक्षण करना बेहद आवश्यक है।

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इतिहास को सही रूप में दर्ज करने के लिए प्रशासन ने स्थानीय इतिहासकारों, शोधकर्ताओं, लेखकों और फोटोग्राफरों को इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है। बैठक में मौजूद विशेषज्ञों ने पुराने दस्तावेजों के संकलन, दुर्लभ तस्वीरों के संरक्षण और ऐतिहासिक स्थलों के वैज्ञानिक तरीके से रिकॉर्ड तैयार करने के सुझाव दिए, जिन पर सहमति जताई गई।

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प्रशासनिक स्तर पर योजना को लागू करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी राहुल आनंद, जिला पर्यटन अधिकारी यशपाल सिंह चौहान और सूचना विभाग के अधिकारी भी बैठक में शामिल रहे। अधिकारियों ने विशेषज्ञों की मदद से जल्द ही इस प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की बात कही है।

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बैठक के दौरान इतिहासकार जय प्रकाश उत्तराखंडी, गोपाल भारद्वाज और अनमोल जैन समेत कई विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। विशेषज्ञों का मानना है कि जिला प्रशासन का यह कदम दून की ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक पटल पर लाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे एक अमूल्य धरोहर के रूप में सुरक्षित करने में मददगार साबित होगा।

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