देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम के देहरादून स्थित हिल डिपो में अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल उठा दिए हैं। डिपो की एक रोडवेज बस बिना फिटनेस के सड़कों पर दौड़ती रही और दो महीने के भीतर इसका 44 बार चालान कट गया। चालान का कुल जुर्माना 4 लाख रुपये से अधिक पहुंच गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
यह पूरा मामला प्रशासनिक पड़ताल के बाद सामने आया है। आंकड़ों के मुताबिक, 22 जनवरी 2026 से 7 मार्च 2026 के दौरान इस बस के सभी 44 चालान वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट न होने के कारण काटे गए थे। इसके बावजूद बस में बेझिझक सवारियां बैठाई जाती रहीं और यात्रियों की जिंदगी लगातार खतरे में डाली जाती रही।
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सभी चालान एक ही आरटीओ ऑफिस से जारी हुए थे और रजिस्टर्ड ऑफिशियल मोबाइल नंबर पर लगातार चालान के नोटिफिकेशन आ रहे थे। डिपो में चालान, परमिट, फिटनेस और प्रदूषण से जुड़े कामों के लिए बाकायदा एक लिपिक की तैनाती होती है! इसके बावजूद हफ्तों तक इन मैसेजों को नजरअंदाज किया गया और कोई कार्रवाई नहीं की गई।
लापरवाही का पर्दाफाश होते ही हिल डिपो में हड़कंप मच गया है और अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ने में लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडलीय महाप्रबंधक सुरेश सिंह चौहान ने हिल डिपो की एजीएम और संबंधित लिपिक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
परिवहन निगम के सूत्रों के मुताबिक, हिल डिपो में लापरवाही और अनियमितता का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बसों के रखरखाव, मरम्मत और संचालन में गड़बड़ियों की शिकायतें मिलती रही हैं। कई मामलों में विभागीय जांच भी बैठाई गई, लेकिन वे फाइलें कभी मुकाम तक नहीं पहुंच सकीं और ठंडे बस्ते में डाल दी गईं।
हालांकि, इस बार 4 लाख रुपये के भारी-भरकम जुर्माने और 44 चालान का मामला उजागर होने के बाद शीर्ष स्तर पर सख्त रवैया अपनाया जा रहा है। मंडलीय महाप्रबंधक कार्यालय ने साफ किया है कि जांच पूरी होते ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

